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Monday, September 12, 2011

ये "नील" रखेगा तुझे इस जिगर में जाना

बड़े अरमान से आते थे तेरे शहर में  जाना 
नंगे पाँव मिलने को भरी दोपहर  में जाना  

भीड़ में कोई  चेहरा  मुझे  जब भूल जाता था 
तू आ जाती थी चुपके से मेरी नज़र में जाना 

तेरी  वफ़ा को हर मोड़ पे हम देखा करते हैं 
दीवाना हो गया तेरा ,कैसे खबर में जाना 

तुझे भूल कर  यारा मैं तनहा भी रह लूँगा 
दे दे सिर्फ इक जाम भर  के ज़हर में जाना 

मेरी तश्वीर को देख लेना,गम नहीं सतायेंगे 
दुआएं रंग लायेंगी अकेले  सफ़र में जाना 

कोई कूचा यहाँ अब महफूज़ है नहीं यारा 
ये "नील" रखेगा तुझे इस जिगर में जाना 


8 comments:

pradeep tiwari said...

bahut hi sundar

वन्दना said...

कोई कूचा यहाँ अब महफूज़ है नहीं यारा
ये "नील" रखेगा तुझे इस जिगर में जाना

is sher ne to gazab kar diya.

Rajesh Kumari said...

achchi sunder ghazal hai.

संजय भास्कर said...

बड़ी खूबसूरती से शब्द दिए...सुन्दर भाव..बधाई.

Neeraj Dwivedi said...

bahut sundar

Life is Just a Life
.

prerna argal said...

bahut sunder prem main doobi apni maasooka ki yaadon ko sanjoy aek bahut hi bhavmai dil ko choonewaali rachanaa.



please visit my blog
www.prernaargal.blogspot.com

रविकर said...

सुन्दर रचना आपकी, नए नए आयाम |
देत बधाई प्रेम से, हो प्रस्तुति-अविराम ||

नीलांश said...

sabhi mitron ka haardik aabhaar