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Monday, September 5, 2011

जिंदगी की पहेली....

मेरे जीवन की कस्ती बिना माँझी के,
इशारों पे चलता रहा,काली आँधी के।
मौत की आहट हमेशा डराती रही,
साँस आती रही,साँस जाती रही।

जख्म नासूर हुआ,थी मरहम की चाहत,
खुदा भी रो दिया,देखा जो मेरी हालत।

कतरा कतरा आँसू पलकों में समाती रही,
साँस आती रही,साँस जाती रही।

मेरे दर्द गम में कई लोग घुल गये,
बिछड़े कई तो कई मिल गये।

जीवन अपना रंग कुछ यूँ दिखाती रही,
साँस आती रही,साँस जाती रही।

आँसू नहीं तुझे पसीना बहाना है,
खुदी को बुलंद कर,मँजिल तक जाना है।

माँ सिसकती रही और बताती रही,
साँस आती रही,साँस जाती रही।

जिंदगी तो अनसुलझी एक पहेली है,
कभी दुश्मन तो कभी सहेली है।

मै समझा नहीं,माँ समझाती रही,
साँस आती रही,साँस जाती रही।

कवि परिचयः-
मनीष कुमार 'नीलू'
समस्तीपुर,बिहार

5 comments:

Nitesh Jha said...

wow.... a very heart touching poem. keep it up Manish Jee

सागर said...

bhaut bhaut khubsurat...

prerna argal said...

आँसू नहीं तुझे पसीना बहाना है,
खुदी को बुलंद कर,मँजिल तक जाना है।

माँ सिसकती रही और बताती रही,
साँस आती रही,साँस जाती रही।
दिल को छु लेनेवाली शानदार और गहनाभिब्यक्ति लिए सुंदर भाव से लिखी बेमिसाल रचना /बधाई आपको /


please visit my blog
www.prernaargal.blogspot.com

Amit said...

its a very beautiful, heart touching poem....
Keep it up Manish sir....

संजय भास्कर said...

सुन्दर, कोमल अभिव्यक्ति।