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Monday, September 5, 2011

तस्मेव श्री गुरुवे नम:

गुरु की महिमा क्या कहूँ, कह न पाऊँ मित्र |
जीवन को महकाते हैं, तन को जैसे इत्र ||

सीखलाते हैं पाठ ये, जीने का भी ढंग |
बतलाते जीवन का मर्म, कितने होते रंग ||

ईश्वर से भी बढ़कर है, गुरु की महिमा जान लो |
गुरु के बिन जीवन दुष्कर, अर्थहीन ये मान लो ||

मन को देते ज्ञान ये, तन को जैसे प्राण |
शुद्धि करते अंतर की, दे शिक्षा का दान ||

आदि काल से शिक्षक ही, करते विकास संपूर्ण |
बिन गुरु के होता है, मानव ही अपूर्ण ||

(शिक्षक दिवस पर सभी को शुभकामनाएँ | तथा उन सभी ब्लॉगरों को प्रणाम जिनसे कुछ भी सीखा है |)

2 comments:

वन्दना said...

शिक्षक दिवस की सुन्दर रचना।

LAXMI NARAYAN LAHARE said...

सप्रेम अभिवादन ,बहुत अच्छा रचना हार्दिक बधाई
आदरणीय ब्लागर बंधुओं ,बहनों सप्रेम अभिवादन
मेरे ब्लाग पर आइये स्वागत है .....
आपका थोड़ा सा स्नेह चाहता हूँ कोसीर ...ग्रामीण मित्र ! का फलोवर बनकर हमारी मार्गदर्शन करे
धन्यवाद
सादर
लक्ष्मी नारायण लहरे





कोसीर... ग्रामीण मित्र !