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Thursday, September 29, 2011

मेरा बेटा

         
जब वो छोटा बच्चा था,
बड़ा होने के लिए  तडपता था|
         मासूमियत   पहचान थी उसकी ,
         छोटी छोटी बातो पर  लड़ता था|
मेरा हाथ पकड़कर वो ,
रहो  पर वो चलता था|
         जिद करना आदत थी उसकी 
         हर जिद पर वो जिद करता था|


आज अब वो बड़ा हो गया 
 दुनियादारी जान गया वो|
           खुद को बस भूलकर
           सबको पहचान गया वो|
मैंने उसका भार उठाया 
मुझे ही भार मान  गया वो|
           बुढ़ापे मे उम्मीद थी उससे
           पर जीते जी  मुझे मार  गया वो |

   रचनाकार -प्रदीप तिवारी
    www.kavipradeeptiwari.blogspot.com
     pradeeptiwari.mca@gmail.com
    9584533161



1 comment:

वन्दना said...

आज अब वो बड़ा हो गया दुनियादारी जान गया वो| खुद को बस भूलकर सबको पहचान गया वो|मैंने उसका भार उठाया मुझे ही भार मान गया वो| बुढ़ापे मे उम्मीद थी उससे पर जीते जी मुझे मार गया वो |

प्रदीप जी कटु सत्य बयान कर दिया…………बेहद संवेदनशील्।