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Saturday, September 10, 2011

तेरे नक़्शे कदम पर.......




चलते हुए तेरे नक़्शे कदम पर
अपनी जिन्दगी ही भुला बैठे
क्या थे हम और
खुद को क्या बना बैठे .....
जनम जनम की बातें थी
पर एक जनम न कट पाया
रूठने मनाने के मंथन में
अपना सर्वस्व ही लुटा बैठे .....
खोज - खोज कर तुमको
हर चेहरे में जीवन ही रीत गया
ढूँढने और करीब आने की दौड़ में
अपना वजूद ही मिटा बैठे .....
क्या थे हम और
खुद को क्या बना बैठे .....
चलते हुए तेरे नक़्शे कदम पर
अपनी जिन्दगी ही भुला बैठे .......!!!!




प्रियंका राठौर

15 comments:

संजय भास्कर said...

अरे कमाल का लिखा है आज तो……………प्रियंका जी

संजय भास्कर said...

अक्सर ऐसा होता है जिंदगी में

mahendra srivastava said...

बहुत बढिया

रविकर said...

आपको बहुत बहुत बधाई --
इस जबरदस्त प्रस्तुति पर |

Dr (Miss) Sharad Singh said...

कोमल मधुर अभिव्यक्ति....

Dr Varsha Singh said...

मन को छू लेने वाली रचना....

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा आज के चर्चा मंच पर भी की गई है!
यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल इसी उद्देश्य से दी जा रही है! अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

डॉ0 ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ (Dr. Zakir Ali 'Rajnish') said...

मन को छू जाने वाले भाव.....

------
क्‍यों डराती है पुलिस ?
घर जाने को सूर्पनखा जी, माँग रहा हूँ भिक्षा।

LAXMI NARAYAN LAHARE said...

अच्छी, भावभरी कविता हार्दिक बधाई ..
कोसीर ...ग्रामीण मित्र ! में आपका स्वागत है

.................................

कोसीर... ग्रामीण मित्र !

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') said...

क्या थे हम और
खुद को क्या बना बैठे .....

उत्कृष्ट संकेत... सार्थक प्रश्न...
सुन्दर गीत...
सादर बधाई....

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) said...

आपकी पोस्ट की हलचल आज यहाँ भी है

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

अच्छी प्रस्तुति

Sapna Nigam ( mitanigoth.blogspot.com ) said...

क्या थे हम और
खुद को क्या बना बैठे .....
चलते हुए तेरे नक़्शे कदम पर
अपनी जिन्दगी ही भुला बैठे .......!!!!

यही जीवन की सच्चाई है.सुंदर व भाव-पूर्ण लिखा है.

PRIYANKA RATHORE said...

aap sabhi ka bahut bahut dhanybad...aabhar

pradeep tiwari said...

bhut hi gahri sachchai hai ...atulniy,avraniya, sacha ka pratiroop hai ap ki ye kavita