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Saturday, September 3, 2011

प्रेरणा शिक्षक से

आसपास के अनाचार से 
खुद को बचाकर रखा ,
पंक में खिले कमल की तरह 
कीचड से स्वम् को बचा कर रखा |
सागर में सीपी बहुत थी 
अनगिनत मोती छिपे थे जिनमे 
उनमे से कुछ को खोजा 
बड़े यत्न से तराशा तुमने|
 जब आभा उनकी दिखती है 
फैलती प्रशस्ति  दिग दिगंत में 
लगता है जाने कितने
प्यार से तराशा गया है 
उनकी प्रज्ञा को जगाया गया है |
काश सभी तुम जैसे होते 
कच्ची माटी जैसे बच्चों को
इसी  प्रकार सुसंस्कृत करते 
अच्छे संस्कार देते 
स्वच्छ और स्वस्थ मनोबल देते |
अपने बहुमूल्य समय में से 
कुछ तो समय निकाल लेते 
फूल से कोमल बच्चों को  
विकसित करते सक्षम करते |
जो कर्तव्य तुमने निभाया 
सन्देश है उन सब को |
तुम से कुछ सीख पाएं 
नई पौध विकसित कर पाएं 
तुम्हारे पद चिन्हों पर चल
खिलाएं नन्हीं कलियों को |
कई वैज्ञानिक जन्म लेंगे 

अपनी प्रतिभा से सब को 
गौरान्वित कर पाएंगे
जीवन में भी सफल रहेंगे |
अन्य विधाओं में भी ,
अपनी योग्यता सिद्ध करेंगे 
जब रत्नों की मंजूषा खुलेगी 
कई अनमोल रत्न निकलेंगे |
आशा

1 comment:

prerna argal said...

आपकी पोस्ट ब्लोगर्स मीट वीकली(७) के मंच पर प्रस्तुत की गई है/आपका मंच पर स्वागत है ,आप आइये और अपने विचारों से हमें अवगत कराइये /आप हिंदी की सेवा इसी तरह करते रहें ,यही कामना है / आप हिंदी ब्लोगर्स मीट वीकलीके मंच पर सादर आमंत्रित हैं /आभार/