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Saturday, August 6, 2011

ग़ज़लगंगा.dg: हर वक़्त कोई रंग हवा में.......

हर वक़्त कोई रंग हवा में उछाल रख.
दुनिया के सामने युहीं अपना कमाल रख.

अपनी अकीदतों का जरा सा खयाल रख.
आना है मेरे दर पे तो सर पे रुमाल रख.

मैं डूबता हूं और उभरता हूं खुद-ब-खुद
तू मेरी फिक्र छोड़ दे अपना खयाल रख.

जो भी शिकायतें हैं उन्हें खुल के बोल दे
अच्छा नहीं कि दिल में तू कोई मलाल रख.

अब तू खुदा-परस्त नहीं खुद-परस्त बन
जीने के वास्ते यहां खुद को निहाल रख.

जिसकी मिसाल ढूँढनी मुमकिन न हो सके
हम सब के सामने कोई ऐसी मिसाल रख.

अपना बचाव करने का हक हर किसी को है
तलवार रख म्यान में, हाथों में ढाल रख.

----देवेंद्र गौतम

6 comments:

somali said...

bahut khoob sir har ek baat lajawaab

Rajesh Kumari said...

bahut achcha likha hai.

Kunwar Kusumesh said...

सभी शेर बढ़िया .वाह.

S.M.HABIB said...

शानदार अशआर....
उम्दा ग़ज़ल...
सादर...

सागर said...

sundar gazal...

Dr (Miss) Sharad Singh said...

शानदार ग़ज़ल.....