*साहित्य प्रेमियों का एक संयुक्त संघ...साहित्य पुष्पों की खुशबू फैलाता हुआ*...."आप अपनी रचना मेल करे अपनी एक तस्वीर और संक्षिप्त परिचय के साथ या इस संघ से जुड़ कर खुद रचना प्रकाशित करने के लिए हमे मेल से सूचित करे" at contact@sahityapremisangh.com पर.....हम आपको सदस्यता लिंक भेज देंगे.....*शुद्ध साहित्य का सदा स्वागत है*.....

Followers

Saturday, August 6, 2011

ये आँसू


From: http://movingimages.files.wordpress.com



लोग कहते हैं कि ये आँसू, तो बस ख़ुशी के आँसू हैं,
हमें याद नहीं शायद, हमने ही ऐसा कभी कहा तो नहीं॥

सुबह से ही, अश्क की बातें करो, तो लोग कहते हैं,
जब से उठे हो अभी तक, हाथ मुँह धोया कि नहीं॥
जो सुबह से ही चालू हो गए...



1 comment:

prerna argal said...

happy friendship day.

"ब्लोगर्स मीट वीकली {३}" के मंच पर सभी ब्लोगर्स को जोड़ने के लिए एक प्रयास किया गया है /आप वहां आइये और अपने विचारों से हमें अवगत कराइये/ हमारी कामना है कि आप हिंदी की सेवा यूं ही करते रहें। सोमवार०८/०८/11 को
ब्लॉगर्स मीट वीकली में आप सादर आमंत्रित हैं।