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Tuesday, August 16, 2011

देश तुम्हारे साथ है अन्ना



भ्रष्टाचार पर तीर की भाँति,
अन्ना आँधी चल निकली है।
भ्रष्टाचारियों!! सावधान अब,
जनता भी जगने चली है।

लोकपाल बिल हो मंजूर,
जनता की भी भागेदारी हो।
सख्त नियम और सख्त कदम हो,
भ्रष्टों की न साझेदारी हो।

हाथ से हाथ जुड़ते ही रहे,
देशहित में सब साथ हो चलें।
यह आँधी बस कामयाब हो,
हम अन्ना के हाथ बन चलें।

देशभक्ति के भाव को दिल में,
फिर से अब जगाना होगा।
गोरों को गाँधी ने खदेड़ा,
हमे अपनो को भगाना होगा।

अन्ना ने जो दी है ज्वाला,
इसे अग्नि बनाना होगा।
अन्ना के संग सर उठाकर,
भ्रटाचार जलाना होगा।

क्रांति की अगणित मशालें,
अब हमारे हाथ है अन्ना।
तुम अकेले नहीं हो यहाँ,
देश तुम्हारे साथ है अन्ना।

भारत माता की जय।



इस कविता का लिंक
मेरा ब्लॉग-मेरी कविता

7 comments:

Dr (Miss) Sharad Singh said...

सार्थक सहज अभिव्यक्ति....

vidhya said...

आपको मेरी हार्दिक शुभकामनायें
वाह ...बेहतरीन प्रस्‍तुति ।

Dr Varsha Singh said...

सार्थक और सुन्दर अभिव्यक्ति....

ईं.प्रदीप कुमार साहनी said...

Dhanyawaad sharad Singh ji..

ईं.प्रदीप कुमार साहनी said...

Dhanyawad Vidhya ji..

ईं.प्रदीप कुमार साहनी said...

Dhanyawad Varsha Singh ji

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

टिप्पणी में देखिए मरे चार दोहे-
अपना भारतवर्ष है, गाँधी जी का देश।
सत्य-अहिंसा का यहाँ, बना रहे परिवेश।१।

शासन में जब बढ़ गया, ज्यादा भ्रष्टाचार।
तब अन्ना ने ले लिया, गाँधी का अवतार।२।

गांधी टोपी देखकर, सहम गये सरदार।
अन्ना के आगे झुकी, अभिमानी सरकार।३।

साम-दाम औ’ दण्ड की, हुई करारी हार।
सत्याग्रह के सामने, डाल दिये हथियार।४।