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Wednesday, August 31, 2011

सन्नाटा


श्री गणपतिजी सदा सहाय करें 



  सबसे पहले मेरे सारे ब्लोगर्स साथियों को गणेशोत्सव की बहुत बहुत
शुभकामनाएं 


सन्नाटा
 
 मैं इस कोठी में बरसों से खडा हूँ ,जिंदगी के उतार चदाव को देखता हुआ
    इंसान को इंसान से लड़ते हुए,एक दूसरे की जान लेते हुए
  और सोचता हूँ,ये किस तरह के जीव हैं ,लालची ,स्वार्थी
     जो अपने स्वार्थ और लालची प्रवृति के कारण कुछ भी कर सकते हैं
       मैं एक बरगद का पेड , जवान से बूढा हो गया यही सोचता हुआ
   दिल दुःख से भर जाता है ,उस प्यारी सी लड़की की कहानी याद करके 
   वो प्यारी सी गुडिया मेरे देखते देखते अति सुंदर नवयोवना बन गई 
       जब वो इस बगीचे में अदा से अपने आधे चेहरे को शर्मा कर छुपाती 
         अपने प्रियतम की याद में लाल रुखसार लिए, तो ईद का चाँद सी नजर आती 
    उसी की तरह सुंदर,सजीला,बांका ,प्यारा सा प्रियतम था उसका
तन की तरह मन भी बहुत सुंदर था जिसका
          दोनों एक दूसरे से बहुत प्यार करते थे,उनके ब्याह को अभी छै महीने ही हुए थे  
    आज वो उसको घर ले जाने आनेवाला था,उसके सपनों को पंख लगानेवाला था
       इसीलिए आज वो खिलखिला रही थी ,इठला रही थी,शर्मा रही थी
        बगीचे के झूले में झूलते हुए मीठे मीठे प्यारे से गीत गुनगुना रही थी
    इतने में उसके मोबाईल की घंटी घनघनाई ,उसने ख़ुशी ख़ुशी उसेअपने कान से लगाईं 
      उसके बाद उसकी एक चीख दी सुनाई ,और वो नीचे गिरी और बेसुध नजर आई
           वहां एक सन्नाटा सा बिखर गया था,जिसे सिर्फ खाली झूले की झूलनेकी आवाज भंग कर रहा था
     उसका हर सपना बिखर गया था, उसका खुशियों से भरा संसार उजड़ गया था
        उसका प्रियतम कुछ स्वार्थी और दुष्कर्मी लोगों के दुष्कर्म के कारण
      इस बुराईयों से भरी दुनिया से कूच कर गया था
     उसने गुंडों से लड़कर एक अबला की इज्जत तो बचाई थी 
    पर उसकी कीमत अपने प्राणों की बलि देकर चुकाई थी
         इंसान सिर्फ इंसान को ही नहीं मारता उससे जुड़े हर रिश्ते को मारता है
     उन रिश्तों के सपने ,आशाएं, जरुरत को मारता है
    और उनकी जिंदगी में छोड़ देता है कभी ना मिटने वाला सन्नाटा 
  सन्नाटा  सन्नाटा   सन्नाटा


4 comments:

Neeraj Dwivedi said...

Badi gahri baat bade marmik tareeke se kahi aapne.

vandana said...

बेहद मार्मिक....

वन्दना said...

बेहद मार्मिक और संवेदनशील अभिव्यक्ति।
विघ्नहर्ता विघ्न हरो
मेटो सकल क्लेश
जन जन जीवन मे करो
ज्योति बन प्रवेश
ज्योति बन प्रवेश
करो बुद्धि जागृत
सबके साथ हिलमिल रहें
देश दुनिया के नागरिक

श्री गणेशाय नम:……गणेश जी का आगमन हर घर मे शुभ हो।

prerna argal said...

बहुत बहुत धन्यवाद आप सबका की आपने मेरी रचना को पसंद किया और इतने अच्छे उत्साह बढ़ानेवाले सन्देश दिए /आप सबका आशीर्वाद मेरी रचनाओं को हमेशा ऐसे ही मिलता रहेगा ,यही कामना है /आभार /