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Monday, August 15, 2011

रूह की बेचैनी

फूलों जैसा मेरा देश मुरझाने लगा
शत्रुओं के पंजों में जकड़ा जाने लगा
रात-दिन मेरी आँखों में एक ही ख्वाब
कैसे हो मेरा 'प्यारा देश' आजाद
कैसे छुडाऊँ इन जंजीरों की पकड़ से इसको
कैसे लौटाऊँ वापस वही मुस्कान इसको
कैसे रोकूँ आँसुओं के सैलाब को इसके
कैसे खोलूँ आजादी के द्वार को इसके
कैसे करूँ कम आत्मा की तडप रूह की बेचैनी को
चढ़ जाऊँ फाँसी मगर दिलाऊँगा आजादी इसको
ये जन्म कम है तो, अगले जन्म में आऊँगा
पर देश को मुक्ति जरूर दिलाऊँगा। 
जो सोचा था कर दिखलाया
भले ही उसको फाँसीं चढ़वाया
शहीद भगत सिंह नाम कमाया
आज भी सब के दिल में समाया।
कवियत्री परिचयः-
डॉ० भावना कुँअर
ऑस्ट्रेलिया (सिडनी)
अध्यापन सिडनी यूनिवर्सिटी
ब्लॉग- http://dilkedarmiyan.blogspot.com/

संक्षिप्त जीवन परिचयः-
नाम:- डॉ० भावना कुँअर 
निवास स्थान:- ऑस्ट्रेलिया (सिडनी)
शिक्षा:- हिन्दी व संस्कृत में स्नातकोत्तर उपाधि, बी० एड०, पी-एच०डी० (हिन्दी) 
शोध-विषय:-  ' साठोत्तरी हिन्दी गज़लों में विद्रोह के स्वर व उसके विविध आयाम'।
विशेष:-  टेक्सटाइल डिजाइनिंग, फैशन डिजाइनिंग एवं अन्य  विषयों में डिप्लोमा।
प्रकाशित पुस्तकें:- तारों की चूनर  ( हाइकु संग्रह) 
                          : साठोत्तरी हिन्दी गज़ल में विद्रोह के स्वर
प्रकाशन:- स्तरीय पत्र-पत्रिकाओं में कविता, कहानी, गीत, हाइकु, बालगीत, लेख, पुस्तक                         
                           समीक्षा, आदि का अनवरत प्रकाशन। अनेक राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय अंतर्जाल   
                           पत्रिकाओं में रचनाओं एवं लेखों का  नियमित प्रकाशित पत्रकाओं जैसे- लोक गंगा, उंदती, वस्त्र परिधान,  
                           अविराम, हाइकु दर्पण, कुछ ऐसा हो, तारिका,पाठक मंच बुलेटिन,वीणा,भाषा मंजूषा (C C E)    
                           Complete Study Material ( M C Q)आदि।                                                                                                                         
                          अपने स्वनिर्मित  जालघर (वेबसाइट) 
                          <http://dilkedarmiyan.blogspot.com/> 
                          पर अपनी नवीन-रचनाओं का नियमित  प्रकाशन।
                          अपने स्वनिर्मित  जालघर (वेबसाइट) 
                          <http://drbhawna.blogspot.com/>
                          पर कला का प्रकाशन
संपादन:- हाइकु संग्रह- “चंदनमन” में, रामेश्वर काम्बोज हिमांशु जी के साथ १८    
                           हाइकुकारों की हाइकु रचनाओं का संपादन. 
           
 अन्य योगदान:- सदस्य- संपादक  समिति सिडनी से प्रकाशित "हिन्दी गौरव" मासिक पत्रिका 
                        :  स्वनिर्मित  जालघर :
                           <http://drkunwarbechain.blogspot.com/>
                           <http://leelavatibansal.blogspot.com/>
संप्रति:- सिडनी यूनिवर्सिटी में अध्यापन  
अभिरुचि:- साहित्य लेखन, अध्ययन,चित्रकला एवं देश-विदेश की यात्रा करना। 

संपर्क:- bhawnak2002@yahoo.co.in <mailto:bhawnak2002@yahoo.co.in>
                          : bhawnak2002@gmail.com 

8 comments:

Neeraj Dwivedi said...

Acchi Koshish ... desh prem bhari huyi ...

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

अच्छी प्रस्तुति

सहज साहित्य said...

रूह की बेचैनी -डॉ भावना की यह कविता आज की विषम परिस्थियों फँसे देश की आत्मा की सही छटपपटाहट है। पाठक रचना के उतार -चढ़ाव में पूरी तरह हो जाता है ।बहुत बधाई भावना जी ! आपकि कलम इसी प्रकार भावों के मोती बिखेरती रहे।

सहज साहित्य said...

रूह की बेचैनी -डॉ भावना की यह कविता आज की विषम परिस्थितियों फँसे देश की आत्मा की सही छटपपटाहट है। पाठक रचना के उतार -चढ़ाव में पूरी तरह हो जाता है ।बहुत बधाई भावना जी ! आपकी कलम इसी प्रकार भावों के मोती बिखेरती रहे।

vidhya said...

अच्छी प्रस्तुति

Rachana said...

फूलों जैसा मेरा देश मुरझाने लगा
शत्रुओं के पंजों में जकड़ा जाने लगा
रात-दिन मेरी आँखों में एक ही ख्वाब
कैसे हो मेरा 'प्यारा देश' आजाद
sunder bhav
achchhi soch
rachana

Udan Tashtari said...

समसामायिक रचना...देश के हालातों का चित्रण एवं एक जागरुकता...बहुत सफल लेखनी. डॉ भावना को साधुवाद इस रचना के लिए.

डॉ. हरदीप कौर सन्धु said...

अच्छी रचना ....ऊँची सोच व ख्याल
आपकी कलम यूँ ही शब्द मोती बिखेरती रहे यही दुआ है
हरदीप