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Wednesday, August 17, 2011

टुकड़े टुकड़े जीवन

टुकड़े टुकड़े जीवन
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बंटा हुआ है ये जीवन टुकड़ों टुकड़ों में
हमें नींद भी आती है टुकड़ों टुकड़ों में
कुछ टुकड़े झपकी के ,कुछ टुकड़े खर्राटे
और कुछ टुकड़े,करवट बदल बदल कर काटे
कुछ टुकड़े खुशियों के, कुछ टुकड़े है गम के
कुछ टुकड़े बचपन के, कुछ टुकड़े यौवन के
प्यार हमारा बंटा हुआ है टुकड़े टुकड़े
कुछ बच्चों को,जीवनसाथी को कुछ टुकड़े
अगर बचा,माँ बाप जरा सा टुकड़ा पाते
हालांकि वो बच्चों पर जी जान लुटाते
देते डाल सिर्फ रोटी के बस दो टुकड़े
दिल के टुकड़े,कर देते है  दिल के  टुकड़े
यूं ही बुढ़ापा कटता है टुकड़ों टुकड़ों में
आंसू बन, बहते दुखड़े,टुकड़ों टुकड़ों में

मदन मोहन बाहेती 'घोटू'

2 comments:

anita agarwal said...

ek bahut bahut sunder or dil ko chu lene wali rachna.. sach baat hai ... jo ma baap apna sara jeevan hum per luta dete hain unhe hum tukda tukda pyar, tukde tukde mei dete hain...
is adbhut rachna ke liye badhai..

vidhya said...

बहुत सशक्त प्रस्तुति।