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Monday, August 1, 2011

मुस्कुरा दिया करना


जिन्दगी रुठी भी रही तो शिकवा नहीं कोई,
बस जब तुझे देखुँ, मुस्कुरा दिया करना;
घाव भर जायेंगे देख कर ही तुझको,
जब पास तेरे आऊँ खिलखिला दिया करना ।

वर्षों की थकान यूँ ही मिट जायेगी,
नींद बनकर थोड़ा सुला दिया करना;
कभी-भी मन जब काठ बन जाये,
इतना एहसान करना,रुला दिया करना ।

समझ न पाऊँ गर दुनिया की रीत,
हौले से बस थोड़ा समझा दिया करना;
नफरत भरी दुनिया में झुलस जाऊँ थोड़ा,
द्वेष की आग को बुझा दिया करना ।

भाग तो रहा हूँ मंजिल की खोज में,
बैठ जाऊँ थककर, उठा दिया करना;
भाग-दौड़ की दुनिया में,जब भागता ही जाऊँ,
प्यार की छाँव में बिठा दिया करना ।

भुल जाऊँ हर जख्म, भुल जाऊँ हर गम,
सर पर बस हाथ फिरा दिया करना;
जुड़ा है तुझसे,हर श्वास, हर खुशियाँ,
बस जब तुझे देखुँ, मुस्कुरा दिया करना ।

www.pradip13m.blogspot.com

3 comments:

LAXMI NARAYAN LAHARE said...

समझ न पाऊँ गर दुनिया की रीत,हौले से बस थोड़ा समझा दिया करना;नफरत भरी दुनिया में झुलस जाऊँ थोड़ा,द्वेष की आग को बुझा दिया करना ।

बहुत -सुन्दर भाव ...हार्दिक बधाई ...

शिखा कौशिक said...

bahut sundar bhav .aabhar

ईं.प्रदीप कुमार साहनी said...

Dhanyawad LAxmi ji, Dhanyawad Shikha ji..