*साहित्य प्रेमियों का एक संयुक्त संघ...साहित्य पुष्पों की खुशबू फैलाता हुआ*...."आप अपनी रचना मेल करे अपनी एक तस्वीर और संक्षिप्त परिचय के साथ या इस संघ से जुड़ कर खुद रचना प्रकाशित करने के लिए हमे मेल से सूचित करे" at contact@sahityapremisangh.com पर.....हम आपको सदस्यता लिंक भेज देंगे.....*शुद्ध साहित्य का सदा स्वागत है*.....

Followers

Sunday, August 7, 2011

मेरी बहन


                                                  

आज बैठी हूँ और 
सोच रहीं हूँ तुझे 
तुझसे मिलने को मन 
करता है और कहता है 
आजा मेरी बहन घर
सुना है तेरे बगैर |

जब खाते थे एक
ही थाली में खाना 
लड़ना झगड़ना और 
रूठ के मान जाना 
आजा मेरी बहन घर 
सुना है तेरे बगैर |

एक्टिवा पर बाज़ार 
निकल घूमना पूरे दिन 
पर अकेले मन नही 
करता अब तो जाने का 
आजा मेरी बहन घर 
सुना है तेरे बगैर |

एक साथ स्कूल जाना 
खेलना खाना और पढना
हँसना खूब मस्त रहना 
अब तू हम सबके पास 
आजा मेरी बहन घर 
सुना है तेरे बगैर |

माँ भी पूछती है 
अब कब आयेगी तू  
तेरी याद करती है और 
हम तारें हैं उनकी आँखों के 
कैसे रह पायेगी वो 
यूँ दूर हमसे तो अब 
आजा मेरी बहन घर 
सुना है तेरे बगैर |

-दीप्ति शर्मा 


                                                               
www.deepti09sharma.blogspot.com

8 comments:

prerna argal said...

"ब्लोगर्स मीट वीकली {३}" के मंच पर सभी ब्लोगर्स को जोड़ने के लिए एक प्रयास किया गया है /आप वहां आइये और अपने विचारों से हमें अवगत कराइये/ हमारी कामना है कि आप हिंदी की सेवा यूं ही करते रहें। सोमवार०८/०८/11 को
ब्लॉगर्स मीट वीकली में आप सादर आमंत्रित हैं।

vidhya said...

वाह बहुत ही सुन्दर
रचा है आप ने
क्या कहने ||
लिकं हैhttp://sarapyar.blogspot.com/

Dr (Miss) Sharad Singh said...

बहुत सुंदर रचना !

Neelkamal Vaishnaw said...

बहुत ही सुन्दर रचा है आपने

Neelkamal Vaishnaw said...

बहुत ही सुन्दर रचा है आपने

Dr Varsha Singh said...

बहुत सुंदर चित्रण . ...बधाई.

दीप्ति शर्मा said...

aap sabka bahut bahut aabhar

LAXMI NARAYAN LAHARE said...

बहुत सुंदर रचना.....