*साहित्य प्रेमियों का एक संयुक्त संघ...साहित्य पुष्पों की खुशबू फैलाता हुआ*...."आप अपनी रचना मेल करे अपनी एक तस्वीर और संक्षिप्त परिचय के साथ या इस संघ से जुड़ कर खुद रचना प्रकाशित करने के लिए हमे मेल से सूचित करे" at contact@sahityapremisangh.com पर.....हम आपको सदस्यता लिंक भेज देंगे.....*शुद्ध साहित्य का सदा स्वागत है*.....

Followers

Friday, August 26, 2011

भ्रष्टाचार मिटा तो....

लोकपाल क्यों लग रहा है शासन को जाल ?
चर्चा को लेकर बना ,असमंजस का हाल । 

असमंजस का हाल , कि कैसे हो निबटारा ? 

भ्रष्टाचार मिटा तो होगा कौन हमारा ? 

जीना होगा कठिन , बहुत मुश्किल आएगी ,
पास हुआ बिल अगर,पोल सब खुल जाएगी .

-डा. नागेश पांडेय 'संजय' 

2 comments:

vidhya said...

सुन्दर

वन्दना said...

शानदार व्यंग्य्।