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Wednesday, August 24, 2011

एक नजरिया यह भी

एक नजरिया यह भी
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जब से प्रधानमंत्री पद के लिए,राहुल गाँधी का नाम आया है
कुछ बढ़ बोले कोंग्रेसी नेताओं का मन कसमसाया है
कल का छोकरा प्रधान मंत्री बन जाएगा
हमारा सारा किया धरा मिटटी में मिल जाएगा
पी.एम की कुर्सी पर कब से गढ़ाए थे नज़र
पर अब लगता है,सपने जायेंगे बिखर
तभी से उल जलूल हरकतें करने लगे है
जिसके दंश अब कोंग्रेस को भी चुभने लगे है
करने लगे है बयानबाजी बेवकूफी भरी
जिससे रोज रोज होती है कोंग्रेस की किरकिरी
बहुत ही हो रही है इसकी छीछालेदर
क्या ये सब हो रहा है जान बूझ कर
अपने ही अपनों पर भीतरी घात कर रहे है
मदम जी,क्या आप ये सब समझ रहे है?

मदन मोहन बाहेती 'घोटू'

1 comment:

शिखा कौशिक said...

सच कहा है आपने .अपने ही तो विश्वासघात करते हैं .आभार

BHARTIY NARI