*साहित्य प्रेमियों का एक संयुक्त संघ...साहित्य पुष्पों की खुशबू फैलाता हुआ*...."आप अपनी रचना मेल करे अपनी एक तस्वीर और संक्षिप्त परिचय के साथ या इस संघ से जुड़ कर खुद रचना प्रकाशित करने के लिए हमे मेल से सूचित करे" at contact@sahityapremisangh.com पर.....हम आपको सदस्यता लिंक भेज देंगे.....*शुद्ध साहित्य का सदा स्वागत है*.....

Followers

Friday, August 26, 2011

इक पेड़ की हँसी





छोटी सी चोट पर हीलोग रोया करते हैं बहुत यूँ ही,
दूसरे का हक मरकर भीखुश रहा करते हैं बहुत यूँ ही,
हमसबकोअपना सब कुछदेने से ही नहीं अघाते,
लोगों से जख्म पाने पर भीहँसा करते हैं बहुत यूँ ही॥

चोट हो बच्चों के पत्थर की फल के लिएतब तो हम,
उनकी आँखों में ख़ुशी देखकरहँसा करते हैं बहुत यूँ ही,
गर हो जख्म लालची मनुष्य... इक पेड़ की हँसी (Complete)


My Blog: Life is Just a Life

4 comments:

vandana said...

हम, सबको, अपना सब कुछ, देने से ही नहीं अघाते,
लोगों से जख्म पाने पर भी, हँसा करते हैं बहुत यूँ ही॥....
पेड़ से सीख दिलाती अच्छी रचना

वन्दना said...

आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
प्रस्तुति आज के तेताला का आकर्षण बनी है
तेताला पर अपनी पोस्ट देखियेगा और अपने विचारों से
अवगत कराइयेगा ।

http://tetalaa.blogspot.com/

Sunil Kumar said...

शिक्षाप्रद रचना आभार

Neeraj Dwivedi said...

Vandana ji aur Sunil ji, Bahut abhar.

वन्दना ji, shukriya tetala par jagah dene ke liye.