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Saturday, August 20, 2011

है कौन दोषी

पैर पसारे भ्रष्टाचार ने
अनाचार ने,
नक्सलवादी उग्रवादी
अक्सर दीखते यहाँ वहाँ |
कोई नहीं बच पाया
मँहगाई की मार से ,
इन सब के कहर से
भटका जाने कहाँ-कहाँ |
जन सैलाब जब उमड़ा
इनके विरोध में
पर प्रयत्न सब रहे नाकाम
होता नहीं आसान
इन सब से उबरना |
है यह एक ऐसा दलदल
जो भी फँस जाता
निकल नहीं पाता
दम घुट कर रह जाता |
यह दोष है लोक तंत्र का
या प्रदेश की सरकार का
या शायद आम आदमी का
सच्चाई है क्या ?
जानना हो कैसे सम्भव
हैं सभी बराबर के दोषी
कोई नहीं अछूता इन से
जब खुद के सिर पर पड़ती है
पल्ला झाड़ लेते हैं |
असफल गठबंधन सरकारें
नेता ही नेता के दुश्मन
ढोल की पोल खोल देते
जब भी अवसर हाथ आता |
आम आदमी
मूक दृष्टा की तरह
ठगा सा देखता रहता
देता मूक सहमति
हर बात में |
क्या दोषी वह नहीं ?
वह विरोध नहीं कर पाता
मुँह मोड़ लेता सच्चाई से
इसी लिए तो पिस रहा है
खुद को धँसता पा रहा है
आज इस दल दल में |

आशा

7 comments:

वन्दना said...

आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
प्रस्तुति आज के तेताला का आकर्षण बनी है
तेताला पर अपनी पोस्ट देखियेगा और अपने विचारों से
अवगत कराइयेगा ।

http://tetalaa.blogspot.com/

Dr (Miss) Sharad Singh said...

आम आदमी
मूक दृष्टा की तरह
ठगा सा देखता रहता
देता मूक सहमति
हर बात में |
क्या दोषी वह नहीं ?


सच को प्रतिबिम्बित करती बेहतरीन रचना...

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

सटीक रचना

Minakshi Pant said...

वह विरोध नहीं कर पाता
मुँह मोड़ लेता सच्चाई से
इसी लिए तो पिस रहा है
खुद को धँसता पा रहा है
आज इस दल दल में |
सुन्दर रचना |

prerna argal said...

बहुत ही सार्थक प्रस्तुति /सच कहा आपने नेताओं की कार गुजारियों से देश की जनता ठगी हुई देखती रहती है /शानदार अभिब्यक्ति के लिए बधाई आपको
आप ब्लोगर्स मीट वीकली (५) के मंच पर आयें /और अपने विचारों से हमें अवगत कराएं /आप हिंदी की सेवा इसी तरह करते रहें यही कामना है /प्रत्येक सोमवार को होने वाले
http://hbfint.blogspot.com/2011/08/5-happy-janmashtami-happy-ramazan.htmlब्लोगर्स मीट वीकली मैं आप सादर आमंत्रित हैं /आभार /

Sadhana Vaid said...

असफल गठबंधन सरकारें
नेता ही नेता के दुश्मन
ढोल की पोल खोल देते
जब भी अवसर हाथ आता |

बिलकुल सच कहा आपने ! यह हमारा दोष अधिक है कि हम चुनाव के समय विवेकहीन होकर नेता का चयन करते हैं और फिर अगले पाँच सालों तक सिर धुनते हैं ! सशक्त रचना के लिये बधाई !

Priyankaabhilaashi said...

सुन्दर रचना..!!!!