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Friday, August 19, 2011

क्रांति बीज

      क्रांति बीज
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मुझे अपने पोते को देना था  उपहार
और कुछ खरीदने के लिए,गया मै बाज़ार
दुकानदार से पूछा,बच्चों के लिए कोई उपहार दिखलाइये
दुकानदार बोला कोई पुस्तक ले जाइये
क्योंकि पुस्तक ज्ञान का भण्डार होती है
सबसे अच्छा उपहार होती है
या फिर कोई खिलौना जैसे उड़ने वाला हेलिकोफ्टर
या रोबोट जो चलता है अपने पैरों पर
या फिर आप ले लीजिये चोकलेट
सभी बच्चों को अच्छी लगती है ये भेंट
तभी कुछ एसा दिखा,जिसे मैंने खरीद लिया,
बिना कुछ ज्यादा सोचे बिचारे
वह था एक तिरंगा झंडा,
और एक सफ़ेद टोपी,
जिस पर लिखा था 'मी हजारे'
मेरा उपहार पाकर मेरा पोता अति प्रसन्न है
और घर में गूँज रहा,
जय हिंद और वन्देमातरम् है

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

1 comment:

vidhya said...

बेहतरीन अभिव्‍यक्ति ।