*साहित्य प्रेमियों का एक संयुक्त संघ...साहित्य पुष्पों की खुशबू फैलाता हुआ*...."आप अपनी रचना मेल करे अपनी एक तस्वीर और संक्षिप्त परिचय के साथ या इस संघ से जुड़ कर खुद रचना प्रकाशित करने के लिए हमे मेल से सूचित करे" at contact@sahityapremisangh.com पर.....हम आपको सदस्यता लिंक भेज देंगे.....*शुद्ध साहित्य का सदा स्वागत है*.....

Followers

Sunday, August 7, 2011

मै तो नीर भरी बदली हूँ

मै तो नीर भरी बदली हूँ
सचमुच मै कितनी पगली हूँ
मदद ताप की ले सूरज से
नीर चुराती मै सागर से
और छुपा अपने आँचल में
भटका करती इधर उधर मै
क्योंकि सिपाही नीलाम्बर के
मुझे  देखते चोरी  करते
और हवायें पीछे पड़ती
बिजली की तलवार कड़कती
और हवाओं के दबाब में
सभी चुराया हुआ माल मै
धरती पर बरसा देती हूँ
पाक साफ़ दामन करती हूँ
नीर चुराया मेरा सब पर
जब गिरता सूखी धरती पर
लोगों के चेहरे हर्षाते
नाले ,नदियाँ सब भर जाते
हरी भरी धरती  मुस्काती
खेतों में फसलें लहराती
मेरा मन हो जाता विव्हल
यदि यह है चोरी का प्रतिफल
चोरी करना  भी स्वीकार्य है
सचमुच ये तो पुण्य कार्य है
इसीलिये मै ना डरती हूँ
बार बार चोरी करती हूँ
ना बदलूंगी,ना बदली हूँ
मै तो नीर भरी  बदली हूँ

मदन मोहन बाहेती 'घोटू'

5 comments:

prerna argal said...

"ब्लोगर्स मीट वीकली {३}" के मंच पर सभी ब्लोगर्स को जोड़ने के लिए एक प्रयास किया गया है /आप वहां आइये और अपने विचारों से हमें अवगत कराइये/ हमारी कामना है कि आप हिंदी की सेवा यूं ही करते रहें। सोमवार०८/०८/11 को
ब्लॉगर्स मीट वीकली में आप सादर आमंत्रित हैं।

vidhya said...

बहुत ही बढ़िया

सागर said...

bhaut hi sundar...

Dr.J.P.Tiwari said...

यदि यह है चोरी का प्रतिफल
चोरी करना भी स्वीकार्य है
सचमुच ये तो पुण्य कार्य है
इसीलिये मै ना डरती हूँ
बार बार चोरी करती हूँ
ना बदलूंगी,ना बदली हूँ
मै तो नीर भरी बदली हूँ

प्रेरक पंक्तियाँ. छायावादी पृष्ठभूमि में कर्तव्य और दायित्वबोध का पाठ पढ़ाती रचना. कालिदास की याद आ रही है जिसमे सूर्य रश्मियों को आरोपित करते हुए राज कर्तव्य का बोध कराया था. जिस प्रकार सूर्य एक बूँद जल सागर से लेकर सहस्र्गुनित कर उसे लोक कल्याणार्थ धरती को वापस करता है उसी प्रकार राजा को भी टैक्स रूप में थोड लेकर बहुमुखी सुविधाओं को प्रदान करना चाहिए.

आभार इस प्रस्तुतीकरण के लिए. और महादेवी तथा कालिदास को याद दिलाने ले लिए भी. सुन्दर विचार. प्रेरक कथ्य नूतन शब्द संयोजन.

Ghotoo said...

आपको रचना पसंद आई उसके लिए धन्यवाद
आपकी टिप्पणी ने मुझे अभिभूत कर दिया और
रचना की भावनाओं को सही परिपेक्ष में सराहा
इसके लिए मै आपका आभारी हूँ .धन्यवाद
घोटू