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Monday, August 1, 2011

"नया सवेरा":-[पुस्तक समीक्षा].....(त्रिलोक सिंह ठकुरेला का बाल गीत संग्रह)

हमने देखा है कि हर माँ-बाप एक बच्चा चाहता है,लेकिन वो यह कभी सोचता है कि उसका लाडला कैसा बने।परिवार,समाज,शिक्षा और परिवेश ही बच्चों की दिशा तय करता है और सामाजिक, आर्थिक,सांस्कृतिक तथा राजनैतिक ताना-बाना ही बच्चों का मार्गदर्शक बनता है।एक लेखक जब अपने बच्चे के लिए जीवन का कोई रूप स्वरूप तय करता है तो उसे पता चलता है कि वह जैसा चाहता है वैसा ही बाल हृदय की चेतना का निर्माण क्यों नहीं होता।बच्चों की इसी अवधारणा पर आबूरोड (सिरोही) के कवि त्रिलोक सिंह ठकुरेला का ‘नया सवेरा’ (बालगीत सग्रंह) हमे बताता है कि बच्चे का सृजन जितना सहज और प्राकृतिक है, उसका विकास और निर्माण उतना ही जटिल है। 
त्रिलोक सिंह ठकुरेला एक बनते हुए कवि हैं और सामाजिक आदर्ष के रूपान्तरकार हैं। इनकी हर रचना प्रकृति और नैतिक मूल्यों पर जोर देती है। यह कहते हैं - ‘दीपक बनें लड़े हम तम से/ज्योतिर्मय हो यह जग हमसे/ कभी न हम घबरायें गम से/तन मन सबल हमारे कर दो/भगवन हमको ऐसा वर दो’। 

इस तरह ठकुरेला अनजाने में ही बालपन को एक अदृश्य भगवान से जोडते हैं और दूसरी तरफ विज्ञान गीत की रचना में अन्तरिक्ष की सैर करते हुए वह यह भी कहते हैं कि ‘कोई ग्रह तो ऐसा होगा जिस पर होगी बस्ती/ माँ बच्चों के साथ वहाँ मै खूब करूंगा मस्ती’।‘नया सवेरा’ (संग्रह) इनकी कविता का सवेरा ही है। 
त्रिलोक सिंह ठकुरेला में एक नवोदित रचनाकार का उत्साह है और वह समाज के मध्यमवर्गीय बच्चे की मानसिकता गढ़ते हैं, जो राष्ट्र प्रेम से ओतप्रोत भी है तो समसामयिक चिन्ताओं को भी हल करता है।पर्यावरण और जल संरक्षण की बात भी यह करते हैं तो वार त्यौहार भी गीतों से सजाते हैं। ठकुरेला आगे चलकर बदलते हुए समाज मे संघर्ष करते हुए बचपन के लिए भी कुछ लिखें तो अच्छा होगा, क्योकि एक कवि बच्चे से क्या चाहता है यह इतना जरूरी नहीं है, अपितु जरूरी यह है कि बच्चा क्या और कैसी दुनिया चाहता है।ठकुरेला एक अक्टूबर सन् उन्नीस सौ छियासठ को जन्में हैं लेकिन वह इस इक्कीसवीं शताब्दी के बच्चों से संवाद कर रहे हैं।त्रिलोक सिंह ठकुरेला का प्रारम्भ कवि वास्तव मे सहज और ईमानदार है। 

रचनाकार परिचयः-
त्रिलोक सिंह ठकुरेला
सम्पर्कः-बँगला संख्या - एल - 99
रेलवे चिकित्सालय के सामने, 
आबूरोड -307026 (राजस्थान)
मोबाईलः-09460714267
ई-मेलः-trilokthakurela@gmail.com 


2 comments:

prerna argal said...

/बच्चों के विकाश के बारे में उनके सृजन के बारे में अच्छी जानकारी /बहुत सुंदर शब्दों के साथ लिखा शानदार लेख /बहुत बहुत बधाई आपको /

शिखा कौशिक said...

sameesha bahut saral shabdon me prastut ki hai .pustak ka parichay achchha laga .aabhar