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Sunday, July 31, 2011

जिन्दगी इश्क की



हुश्न ऐसा हो, जो नुमाइश ना भी हो, तो दिखता हो,
जश्न ऐसा हो, जो साकी... जिन्दगी इश्क की (Complete)


2 comments:

Dr Varsha Singh said...

वाह..क्या खूब लिखा है आपने।

LAXMI NARAYAN LAHARE said...

सुन्दर भाव ,बहुत खूब ....हार्दिक बधाई ...