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Thursday, July 28, 2011

क्या बात है...........



किताबों के पन्ने पलट के सोचते हैं  
यूँ पलट जाए जिंदगी तो क्या बात है

तमन्ना जो पूरी हो ख्वाबों में 
हकीकत बन जाए तो क्या बात है

कुछ लोग मतलब के लिए ढूंढते है मुझे 
बिन मतलब कोई आये तो क्या बात है

क़त्ल करके तो सब ले जायेंगे दिल मेरा 
कोई बातों से ले जाए तो क्या बात है 

जो शरीफों की शराफत में बात न हो
एक शराबी कह जाए तो क्या बात है 

जिंदा रहने तक तो ख़ुशी दूंगा सबको 
किसी को मेरी मौत पे ख़ुशी मिल जाए तो क्या बात है.....

नीलकमल वैष्णव"अनिश"  
       उपाध्यक्ष
छत्तीसगढ़ लेखक संघ
(लेखक संघ कोसीर)
www.neelkamalkosir.blogspot.com
09630303010, 09713430999

4 comments:

Neeraj Dwivedi said...

Wah Bahut sundar rachna..

vidhya said...

वाह बहुत ही सुन्दर
रचा है आप ने
क्या कहने ||

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बहुत बढ़िया ...क्या बात है ...

Dorothy said...

खूबसूरत रचना. आभार.
सादर,
डोरोथी.