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Saturday, July 30, 2011

स्वार्थी दुनिया

पंक्षियो  की कौतुहल आवाज़ से मेरी आँख खुली | मौसम सुहावना था | पवन की मंद महक दिवाना बना रही थी | बाहर लॉन मै कई पंक्षी चहक रहे थे मौसम का आनंद लेने के लिए मैने एक चाय बनायीं और पीने लगी | अचानक देखा की कई कुतो ने एक तोते को पकड़ लिया और उसे बड़ी मर्ममय  के साथ मारने लगे | मानो मेरे तो होश उड़  गये मैने पास मै पड़ा एक डंडा उठाया और उन्हें भगाया | वे तोते को वही छोड़कर भाग गए | मैने तोते का इलाज किया उसे पानी पिलाया लेकिन तोता २-३ घंटे से ज्यादा नहीं जी सका | मै उसे नहीं बचा सकी इस बात का बहुत दुःख है | मैने देखा की किस तरह उन कुतो ने अपनी भूख  मिटाने के लिए एक मासूम सुन्दर तोते को मार दिया | और मैने महसूस किया कि इस मतलबी दुनिया मे कुछ लोगो के स्वार्थ को पूर्ण करने के लिए ना जाने कितने मासूमो को अपनी बलि देनी पड़ती है |

- दीप्ति शर्मा 

9 comments:

Rajesh Kumari said...

yeh dunia to svaartho se bhari padi hai yeh to kutton ki baat hai insaan apni bhookh mitane ke liye na jaane roj kitni jaanon ko khatm karta hai.

मनोज कुमार said...

प्रेरक प्रसंग!

LAXMI NARAYAN LAHARE said...

सार्थक भाव ,सुन्दर प्रेरक ....हार्दिक बधाई ...

udaya veer singh said...

very possessive creation ,heart touching stance . thanks .

Dr Varsha Singh said...

बहुत ही सार्थक और सारगर्भित पोस्ट....

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

प्रेरक ... आपकी संवेदनशीलता का पता चलता है

सागर said...

prerak post....

vidhya said...

बहुत सुन्दर प्रेरक है

S.M.HABIB said...

सच कहा दीप्ती जी इस दुनिया में जो जिसको मार सकता है मार के आपनी स्वार्थसिद्धी कर रहा है....
सार्थक चिंतन....

"...लिया और उसे बड़ी मर्ममय के साथ मारने लगे ..."
इस वाक्य में ध्यान देने का सादर आग्रह है....
सादर....