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Saturday, July 30, 2011

अहसास.....!


कविता ....

जब बहुत उदास होता हूँ मैं
तो सिर्फ कापी और पेन हाथ में आते हैं
पता नहीं क्यूँ कर हम
जिसे भुलाना चाहते है 
वह उतना याद आते हैं
लेकिन यह बात आखिर जाकर 
उन्हें बताएगा कौन
क्योंकि यह सारी दुनियां
तो आखिर हो गयी है मौन
परन्तु यह एक सास्वत सत्य है
की यह बात आखिर वह
भी किसी दिन जान जाएगी
काश ! वह एक बार मुझको आजमाती
मैं तो सिर्फ और सिर्फ उसी को
देखता रहता हूँ सिर्फ ख्वाबों में
लेकिन क्या ?  यह ख्वाब सच होगा
हाँ शायद हो जाये क्योंकि
यह प्यार है ही ऐसा कोमल  अहसास 

नीलकमल वैष्णव "अनिश" 

3 comments:

sushma 'आहुति' said...

very nice...

Neeraj Dwivedi said...

बहुत सुन्दर

LAXMI NARAYAN LAHARE said...

वह एक बार मुझको आजमातीमैं तो सिर्फ और सिर्फ उसी कोदेखता रहता हूँ सिर्फ ख्वाबों मेंलेकिन क्या ? यह ख्वाब सच होगाहाँ शायद हो जाये ....
बहुत सुन्दर ,.....