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Saturday, July 30, 2011

काश ऐसा होता…....



काश ऐसा होता

      उड़ सकती मैं भी
  
      खुले आसमां में

     पंछियों की तरह

बादलों के संग

        धीरे धीरे विचरती
  
               काश ऐसा होता.........

       चल सकती मैं भी

    हवा के साथ साथ

 गुनगुनाती हुई

        रागिनी की तरह

               काश ऐसा होता..........

        पहुंच जाती मैं भी

      तारों के गुलिस्ताँ में

 चाँद के संग

           चाँदनी की तरह

           इठलाती हुई

               निशा के संग

             धीरे-धीरे विचरती


            काश ऐसा होता.......

       काश ऐसा होता.......
          

                                                                                 सुमन मीत






ब्लॉग ..बावरा मन
                अर्पित सुमन 



   

7 comments:

शालिनी कौशिक said...

fir to kya bat hoti yadi aisa hota.bahut sundar bhavabhivyakti.badhai.

LAXMI NARAYAN LAHARE said...

सुन्दर भाव ,हार्दिक बधाई ...

Rajesh Kumari said...

bahut achche sapne achchi kalpna....kash hume bhi pankh mil gaye hote.

Ghotoo said...

bahut sundar rachna-sare sapne sach nahi hote
ghotoo

अनुपमा त्रिपाठी... said...

sunder kalpana...
man kho gaya ...

वन्दना said...

बहुत सुन्दर भावाव्यक्ति।

prerna argal said...

आपकी पोस्ट की चर्चा सोमवार १/०८/११ को हिंदी ब्लॉगर वीकली {२} के मंच पर की गई है /आप आयें और अपने विचारों से हमें अवगत कराएँ /हमारी कामना है कि आप हिंदी की सेवा यूं ही करते रहें। कल सोमवार को
ब्लॉगर्स मीट वीकली में आप सादर आमंत्रित हैं।