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Sunday, July 31, 2011

जिन्दगी

मेरे अहसासों की उस हवा
की महक सी है मेरी हस्ती
कोशिश करूँ तमाम पर
हिचकोलो से गुजरती हुई
चलती है ये मेरी कस्ती
तमाम उलझनों से जुझते
जिन्दगी की राहों से अनजान
ढलती हुई जीवन की मस्ती
ख्वाहिशो की अभिलाषा सी
सच्चाई तलाशती हुई है
चाँद लम्हों की मेरी बस्ती|


- दीप्ति शर्मा

5 comments:

vidhya said...

बहुत ही सुन्दर रचा है गहरी से .......

Rajesh Kumari said...

hichkole khaati meri kashti.bahut suder bhaavon ki abhivyakti.

LAXMI NARAYAN LAHARE said...

सुन्दर भाव ,बहुत खूब ....हार्दिक बधाई ...

Neeraj Dwivedi said...

Bahut sundar bhav..

दीप्ति शर्मा said...

aap sabhi ka bahut dhanyevad