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Friday, July 29, 2011

एक -पत्र



गांवली की चिट्ठी ......


बस इतनी ही शिकायत है ....


रात इतने तन्हें, क्यों होते हैं 
अलग -अलग हैं हम 
फिर भी 
पास मैं तुम्हें पाती हूँ 
पर किस्मत को क्यूँ दोस दूँ ...
बस इतनी ही शिकायत है रब से 
जिसे पाना हो मुश्किल 
मोहब्बत उन्ही से क्यूँ होती है ...
साहिल ....
आगे लिखती हैं ....
इस जीवन की यही है कहानी ....
आनी -जानी है दुनिया ...
जैसे दरिया का पानी ....
तुम्हारी ...गांवली 

लक्ष्मी नारायण लहरे "साहिल '

7 comments:

शालिनी कौशिक said...

जिसे पाना हो मुश्किल
मोहब्बत उन्ही से क्यूँ होती है ...
bahut सही व् सुन्दर भावाभिव्यक्ति लक्ष्मी narayan जी.बधाई

sushma 'आहुति' said...

खुबसूरत अभिवयक्ति....

Neelkamal Vaishnaw said...

क्या बात है पत्रकार महोदय बहुत खूब बहुत ही प्यारी और सुन्दर कविता है ख़ास कर मेरी वो प्यारी शब्द गांवली मुझे बहुत भाति है आप अपने कविताओं में उसका बहुत अच्छा उपयोग करते हैं बधाई हो....


आपका मित्र
नीलकमल वैष्णव "अनिश"

vidhya said...

वाह बहुत ही सुन्दर
रचा है आप ने
क्या कहने ||

LAXMI NARAYAN LAHARE said...

आदरणीय ,...शालिनी कौशिक जी , sushma 'आहुति' जी , Neelkamal Vaishnaw जी ,
vidhya जी ,सप्रेम अभिवादन ...
आप लोगों का स्नेह के लिए हार्दिक आभार ...

संजय भास्कर said...

एक सम्पूर्ण पोस्ट और रचना!
यही विशे्षता तो आपकी अलग से पहचान बनाती है!

LAXMI NARAYAN LAHARE said...

संजय भास्कर जी ,सप्रेम अभिवादन ...स्नेह के लिए हार्दिक आभार ...