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Sunday, July 31, 2011

हे प्रभु अब लौट आओ ! ...... लक्ष्मी नारायण लहरे ...

हे प्रभु अब लौट आओ ,
प्रेम की दयानिधि 

ज्ञान के विधाता ,
मनुष्य के उद्धार करता 

अब प्रगट हो जाओ ,
सच और झूठ की 


पोल खोल दो ,
भाई को भाई से मिला दो 

जाती -भेद को हटा दो ,
धर्म -कर्म बता दो 

साहिल को रूप दिखा दो ,
हे प्रभु अब लौट आओ 

संकट से बचा लो ,
कुर्सी की लड़ाई समझा दो 

कानून की काली पट्टी हटा दो ,
तलवार के जगह फुल थमा दो 

सुने हर गोद में औलाद थमा दो ,
बेटा -बेटी के भेद को मिटा दो 












अब तो "साहिल " को गले लगा लो ,
हे प्रभु अब लौट आओ .............

लक्ष्मी नारायण लहरे  "साहिल "
 कोसीर ... ग्रामीण मित्र !


8 comments:

Dr Varsha Singh said...

अंतर्मन को उद्देलित करती पंक्तियाँ, बधाई.....

LAXMI NARAYAN LAHARE said...

आदरणीया .. Dr Varsha Singh जी
सप्रेम अभिवादन ..
हार्दिक आभार ..
सादर
लक्ष्मी नारायण लहरे

Ghotoo said...

sundar rachna

ghotoo

LAXMI NARAYAN LAHARE said...

Ghotoo जी

सप्रेम अभिवादन ..
हार्दिक आभार ..
सादर
लक्ष्मी नारायण लहरे

संजय भास्कर said...

वाह बेहतरीन !!!!

Rajesh Kumari said...

bahut bhaavpoorn kavita.hey prabhu ab laut aao.

LAXMI NARAYAN LAHARE said...

संजय भास्कर जी

सप्रेम अभिवादन ..
हार्दिक आभार ..

LAXMI NARAYAN LAHARE said...

आदरणीया .. Rajesh Kumari जी
सप्रेम अभिवादन ..
हार्दिक आभार ..
सादर
लक्ष्मी नारायण लहरे