*साहित्य प्रेमियों का एक संयुक्त संघ...साहित्य पुष्पों की खुशबू फैलाता हुआ*...."आप अपनी रचना मेल करे अपनी एक तस्वीर और संक्षिप्त परिचय के साथ या इस संघ से जुड़ कर खुद रचना प्रकाशित करने के लिए हमे मेल से सूचित करे" at contact@sahityapremisangh.com पर.....हम आपको सदस्यता लिंक भेज देंगे.....*शुद्ध साहित्य का सदा स्वागत है*.....

Followers

Friday, July 29, 2011

माही....: ये मेरी किस्मत...

माही....: ये मेरी किस्मत...

जाने कितने जतन किए होंगे मैंने,
इन लबों को फिर खुशी देने के वास्ते,
पर किस्मत का हर ज़र्रा हर बार,
मेरा हर करम निचोड़ गया...।

- महेश बारमाटे "माही"

2 comments:

vidhya said...

वाह बहुत ही सुन्दर
रचा है आप ने
क्या कहने ||

लिकं हैhttp://sarapyar.blogspot.com/
अगर आपको love everbody का यह प्रयास पसंद आया हो, तो कृपया फॉलोअर बन कर हमारा उत्साह अवश्य बढ़ाएँ।

LAXMI NARAYAN LAHARE said...

सार्थक ,सुन्दर भाव ,बहुत खूब ....हार्दिक बधाई ...