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Saturday, November 16, 2019

चलो हम बीयर पियें

इस गर्मी वाले मौसम में ,कुछ पल तो खुशियों के जियें
चलो हम बीयर पियें
चिल्ड ,उफनती,झागिल बीयर ,की पी घूँट गला तर होगा
गर्मी सब फुर्र  हो जायेगी ,मस्ती भरा असर पर  होगा
हल्का हल्का सा सरूर भी ,आयेगा पर धीरे धीरे
दारू जैसी झट न चढ़ेगी ,नशा  छायेगा   धीरे धीरे
बड़ी देर तक वक़्त कटेगा ,एक गिलास हाथ में लिये
चलो हम बीयर पियें
सॉफ्ट नहीं ना हार्ड बीच की ,है ये ड्रिंक बड़ी अलबेली
ठंडी है पर बड़ी देर तक ,मस्ती देती ,कर अठखेली
दारू नहीं ,दवा के जैसा ,होता है ये जौ का पानी
लम्बे मग में ,घूँट घूँट पी ,कट जाती  है ,शाम सुहानी
उठा गिलास चीयर जब कहते ,जल जाते है दिल में दिये
चलो हम बीयर पियें
बैठ बार में ,यदि मस्ती में ,करना टाइम पास अगर है
सबसे अच्छी ,सबसे सस्ती ,ड्रिंक  दोस्तों ये बीयर है
बीयर से चीयर करने का ,हमे जानना ,मर्म चाहिए
बीयर चिल्ड ,लगे है अच्छी ,लेकिन डीयर गर्म चाहिए
टूटे दिल के फटे रिलेशन ,घूँट घूँट ,तुरपन कर सियें
चलो हम बीयर पियें

मदन मोहन बाहेती 'घोटू '
सख्त और नरम

मत सख्त रहो और इतराओ
तुम नरम बनो ,नरमी लाओ

हम सख्त अन्न ना खा पाते
पिसवा कर आटा बनवाते
आटा भी ना खाया  जाता
बन नर्म न जब तक गुंथ जाता
उसकी रोटी बन सिक जाती
खाने के काम तभी आती
लोगों के काम आप आओ
तुम नरम बनो,नरमी लाओ

है दानेदार ,शकर बोरी
मीठी, खाई न जाय कोरी
काम आ जाती आसानी में
चाशनी बने घुल पानी में
रस पिये  जलेबी, मन भाये
रसगुल्ला, रस से सन जाये
बूंदी,गुलाबजामुन खाओ
तुम नरम बनो,नरमी लाओ

हरदम करते रहना सख्ती
कोई को भली नहीं लगती
होते जो लोग नरम दिल है
सब खुश होते उनसे मिल है
ना अच्छी सख्तमिजाजी है
रखती न किसी को राजी है
बन नम्र ,प्रेम सबका पाओ
तुम नरम बनो ,नरमी लाओ

मदन मोहन बाहेती 'घोटू '

Friday, November 15, 2019

नहीं बूढ़े हुए है हम

आदतें बचपने वाली ,अब तलक  है कई कायम
जाने फिर क्यों लोग कहते है कि बूढ़े हो गए हम

दाँत कुछ टूटे और  हिलते ,     होते थे तब ,वैसे अब भी
पकड़ कर,ऊँगली किसी की ,चलते  थे तब चलते अब भी ,
तब भी हम जिद्दी बहुत थे , जिद नहीं अब भी हुई कम
देख सुन्दर चीज कोई ,अब भी है जाते मचल हम
न जाने क्या सोच करके ,दिया करते ,अब भी मुस्का
ठंडी कुल्फी और चुस्की का हमें है अब भी चस्का
ध्यान हम पर कोई ना दे ,मानते अब भी बुरा हम
आदते बचपने वाली,अब तलक है कई कायम
जाने फिर क्यों लोग ये कहते है बूढ़े हो गए हम

बचपने में बहुत अच्छी ,हमको लगती थी मिठाई
आज भी अच्छी लगे, है मना ,फिर भी जाय खाई
सिनेमे का शौक बचपन की तरह अब भी बना है
तब भी गाते ,फ़िल्मी गाने ,अब भी लेते गुनगुना है
बचपने में माँ का पल्लू ,पकड़ते थे प्यार पाने
अब पकड़  बीबी का पहलू ,लगे है टाइम बिताने
तब पिता से और अब ,बच्चों से डर कर ,रह रहे हम
आदतें बचपने वाली, अब तलक है कई कायम
जाने फिर क्यों लोग ये कहते है बूढ़े हो गए हम

मदन मोहन बाहेती 'घोटू '
मैं हूँ तुम्हारा चरणदास

हे प्रिये तुम्हारा सेवक मैं ,हूँ चाटुकार और देवीदास
मैं युवा रहूँ करने सेवा ,नित खाया करता च्यवनप्राश
नाचूँ तुम्हारे इशारों पर ,फिर भी तुम डालो नहीं घास
हे देवी मुझ पर कृपा करो ,मैं  हूँ तुम्हारा  चरणदास
तुम प्रिये सदा संतुष्ट रहो
मुझसे न कभी भी रुष्ट रहो  
 मन मुदित हमेशा  आनंदित
चेहरा हरदम पुलकित पुलकित
हो अधर सदा मुस्कान लिए
 हो रूप सदा आव्हान लिए  
आँखों में प्यार उमड़ता हो
चंचलता और चपलता  हो
चंदा से प्यारे चेहरे पर ,रसगुल्ले जैसी हो मिठास
हे देवी मुझ पर कृपा करो ,मैं हूँ तुम्हारा चरणदास  
सर पर बदली से इठलाते
हो केश हवा मेंऔर मैं  लहराते
उन्मुक्त मचलता यौवन हो
और देह तुम्हारी चंदन हो
हिरणी सी चाल बड़ी प्यारी
हर सांस साँस में सिसकारी
 यह रूप जवानी की हाला
पी रहूँ सदा मैं  मतवाला
तुम कली और मैं अली बन कर ,मँडराऊ तुम्हारे आसपास
हे देवी मुझ पर कृपा करो ,मैं हूँ तुम्हारा चरणदास
बीते जीवन उल्हास भरा
कुछ हास और परिहास भरा  
मस्ती हो मौज ,सरसता हो
पल पल बस प्यार बरसता हो
चिंता न मन में किंचित हो
जीवन सुखमय ,आनंदित हो
हम भोगें  सब सुख जीवन के
अरमां सब पूरे हो मन के
जी करता हमतुम रहें पास आपस में बांधे बाहुपाश  
हे देवी मुझ पर कृपा करो ,मैं  हूँ तुम्हारा चरणदास

मदन मोहन बाहेती 'घोटू '
यस मेडम-दो छक्के

यस करने में यश भरा ,बहुत है यस में दम
पत्नी से हरदम कहो ,यस यस यस  मेडम
यस यस यस मेडम ,ख़ुशी और यश बरसेगा
प्यार मिले पत्नी का ,और जीवन सरसेगा    
कह घोटू पत्नी संग यदि है ख़ुशी चाखनी
मख्खन मारो उसे ,मिलेगी दाल माखनी

पत्नी पूजन से सदा ,मिले प्रसाद अनूप
करो प्रशंसा रूप की ,गरम मिलेगा सूप
गरम मिलेगा सूप ,सराहो उनका जलवा
पाओगे तुम गरम गरम गाजर का हलवा
मिले गुलाब जामुन ,गुलाबी गाल बताओ
कह रसवंती अधर ,यार रसगुल्ले खाओ

घोटू 
क्या इसी दिन के खातिर

है खाली गृहस्थी ,नहीं घर में बस्ती ,
न खुशियां न मस्ती ,तरसती है अम्मा
अगर संग होते ,जो पोती और पोते ,
ये सपने संजोते ,टसकती  है अम्मा
पिताजी बिचारे ,बुढ़ापे के मारे ,
टी वी सहारे ,समय काटते है
है बीबी अकेली ,जो उनकी सहेली ,
उसे प्यार करते ,कभी डाटतें है
भले दो है बच्चे ,और दोनों ही अच्छे
पढ़ लिख के दोनों ही खुश हाल में है
बेटा कनाडा  में डॉलर कमाता ,
और बेटी लंदन में ,ससुराल में है
आ जाते मिलने या छुट्टी मनाने ,
बस कुछ दिनों ,एक दो साल में है
किसी को भी फुर्सत नहीं जो खबर ले ,
कि माँ बाप बूढ़े है ,किस हाल में है
उन्हें पाला पोसा ,पढ़ाया लिखाया ,
और काबिल बनाया ,इसी दिन के खातिर
बड़े  हो ,बुढ़ापे में सेवा करेंगे ,
ये सपना संजोया ,इसी दिन के खातिर
कभी गर्व करते थे काबिल है बच्चे ,
सभी ने मगर कर लिया है किनारा  
अगर एक बच्चा ,निकलता नालायक ,
बुढ़ापे में बनता वो उनका  सहारा


मदन मोहन बाहेती 'घोटू '

Tuesday, November 12, 2019

Good day Dear Friend,



Good day Dear Friend,

My name is Panejo Peters, l really need your assistance. My Fater died two years ago and the family members wants to kill 

me and my kid Sister and seat on the inheritance he left for us with a bank, l am now in a hiding with my kids and the documents of inheritance is with us.

Please help us to have this fund transferred to your country and we will fly to join you.

l will be waiting for your reply kind response.

Please kindly write me back for more details please email me back for more details

I hope you will help see my last wishes come true.

Yours,
Panejo Peters

Monday, November 4, 2019

भरोसे की भैंस

भले कुछ दिन दूध गाढ़ा दे गयी है
भरोसे की भैंस पाड़ा दे गयी है

थी बड़ी उम्मीद अबके होगी पड़िया
और मिलेगा ढेर सारा दूध बढ़िया
बनेगी पड़िया बड़ी हो ,भैंस सुन्दर
दूध का उत्पाद दूना जाएगा बढ़
इतने  दिन 'ड्राई 'थी,पर करी सेवा
आस थी कि मिलेगा सेवा से मेवा
खिलाया था घास ,बंटा अच्छा खासा
मिली पर इस बार भी हमको निराशा
हम मनुष्यों में कई है अजब  बातें
होता है बेटा तो हम खुशियां मनाते
बेटी हो तो होता है अफ़सोस मन में
बेटियां पर चाहते  पशु के जनन  में
बेटे बेटी में नहीं है कोई अंतर
है हमारी प्रवर्ति तो लालची पर
लाभ मिलता जब  ,जहाँ खुशियाँ मनाते
पड़िया ,बछिया होना है हमको सुहाते
हृदय को दुख ढेर सारा दे गयी है
भरोसे की भैंस पाड़ा दे गयी है

घोटू 

एक लड़की  को देखा तो ऐसा लगा

 

कल मैंने फिर एक लड़की देखी

पचास साल के अंतराल के बाद

मुझे है याद

पहली ड़की तब देखी थी जब मुझे करनी थी शादी

ढूंढ रहा था एक कन्या सीधी सादी

मैं उसके घर गया

मेरे लिए ये अनुभव था नया

वैसे तो कॉलेज के जमाने में खूब लड़कियों को छेड़ा था

काफी किया बखेड़ा था

पर उस दिन की बात अलग थी इतनी

मैं ढूंढ रहा था अपने  लिए एक पत्नी

थोड़ी देर में ,

हाथ में एक ट्रे में  चाय के कप लिए ,

वो शरमाती हुई आई

थोड़ी डगमगाती हुई आई

चाय के कप आपस में टकरा कर छलक रहे थे

उसके मुंह पर घबराहट के भाव झलक रहे थे

थोड़ी देर में वो सेटल हुई और चाय का कप मेरी ओर बढ़ाया

मैं भी शरमाया,सकुचाया और मुस्काया

फिर चाय का कप होठों से लगाया  

तो उसकी मम्मी ने फ़रमाया

चाय बेबी ने है खुद बनाई ,

आपको पसंद आई

बेसन की बर्फी लीजिये बेबी ने ही बनाया है

इसके हाथों में स्वाद का जादू समाया है

मैंने लड़की से पूछा और क्या क्या बना लेती हो ,

लड़की घबरा गयी ,भोली थी

बोली कृपया क्षमा करना ,मम्मी झूंठ बोली थी

मम्मी ने कहा था की लड़का अगर पूछे किसने बनाया ,

तुम झूंठ बोल देना ,पर मेरा मन झूंठ नहीं बोल पाता

पर सच ये है कि किचन का काम मुझे ज्यादा नहीं आता

ये चाय मैंने नहीं बनाई है

और बर्फी भी बाजार से आई है

उसकी इस सादगी और सच्चाई पर मैं रीझ गया

प्रेम के रस भीज गया

उसकी ये अदा ,मेरा मन चुरा गयी

और  वो मेरे मन भा  गयी

और एक दिन वो मेरी बीबी बन कर गयी

बाद में पता लगा कि ये सच और झूंठ का खेल ,

सोचा समझा प्लान था

जिस पर मैं हुआ कुर्बान था

जिसने लड़की की कमजोरी को खूबसूरती से टाल दिया

और उस पर सादगी का पर्दा डाल दिया

पचास वर्षों के बाद  ,

मैं अपने बेटे के लिए लड़की देखने गया था कल

मिलने की जगह उसका घर नहीं ,

थी एक पांच सितारा होटल

लड़की डगमगाती हुई हाथ में चाय की ट्रे लाइ

शरमाई

बल्कि आर्डर देकर वेटर से कोल्ड कोफ़ी मंगवाई

अब मेरा कॉफी किसने बनाई पूछना बेकार था

पर मैं उसके कुकिंग ज्ञान को जानने को बेकरार था  

जैसे तैसे मैंने खानपान की बात चलाई पर

इस फील्ड के ज्ञान में भी वो मुझसे भारी थी

उसे 'मेग्गी' से लेकर 'स्विग्गी' की पूरी जानकारी थी  

फिर मैंने ऐसे मौको पर पूछे जानेवाला,

 सदियों पुराना प्रश्न दागा

क्या तुम पापड़ सेक सकती हो जबाब माँगा

उसने बिना हिचकिचाये ये स्पष्ट किया

वो जॉब करती है और प्रोफेशनल लाइफ के दरमियाँ

बेलने पड़ते है कितने ही पापड़

तभी पा सकते हो तरक्की की सीढ़ी चढ़

जब ये पापड़ बेलने की स्टेज निकल जायेगी

पापड़ सेकने की नौबत तो तब ही आएगी

जबाब था जबरजस्त

मैं हो गया पस्त

मैंने टॉपिक बदलते हुए पूछा 'तुम्हारी हॉबी '

उसने अपने माँ बाप की तरफ देखा

और उत्तर फेंका

मैं किसी को भी अपने पर हॉबी नहीं होने देती हूँ

घर में सब पर मैं ही हाबी रहती हूँ

और शादी के बाद ये तो वक़्त बताएगा

कौन किस पर कितना हॉबी रह पायेगा

हमने कहा हॉबी से हमारा मतलब तुम्हारे शौक से है

वो बोली शौक तो थोक से है

देश विदेश घूमना ,लॉन्ग ड्राइव पर जाना

मालों में शॉपिंग ,होटलों  में खाना

सारे शौक रईसी है

उनकी लिस्ट लंबी है

हमने कहा इतने ही काफी है

इसके पहले कि मैं कुछ और पूछता ,

उसने एक प्रश्न मुझ पर दागा

और मेरा जबाब माँगा

आप अपने बेटे बहू के साथ रहेंगे

या उन्हें अपनी जिंदगी अपने ढंग से जीने देंगे

और बात बात में उनकी लाइफ में इंटरफियर करेंगे

ये प्रश्न मेरे दिमाग में इसलिए आया है

क्योंकि मुझे देखने जिसे शादी करनी है वो नहीं आया है

आपको भिजवाया है

प्रश्न सुन कर मैं सकपकाया

क्या उत्तर दूँ ,समझ में नहीं आया

मैंने कहा ये सोच नाहक है

हर एक को स्वतंत्रता से जीने का हक़ है

हम भला बच्चों की जिंदगी में टांग क्यों अड़ायेगे

अपने अपने घर में अपनी अपनी मल्हार जाएंगे

हम भी अपनी आजादी और सुख देखेंगे

और किसी को अपने पर हॉबी नहीं होने देंगे

वो तो उत्सुकता वश हम तु म्हे देखने गए ,