*साहित्य प्रेमियों का एक संयुक्त संघ...साहित्य पुष्पों की खुशबू फैलाता हुआ*...."आप अपनी रचना मेल करे अपनी एक तस्वीर और संक्षिप्त परिचय के साथ या इस संघ से जुड़ कर खुद रचना प्रकाशित करने के लिए हमे मेल से सूचित करे" at contact@sahityapremisangh.com पर.....हम आपको सदस्यता लिंक भेज देंगे.....*शुद्ध साहित्य का सदा स्वागत है*.....


Friday, February 19, 2021

Payment from your account.


I have to share bad news with you.
Approximately few months ago I have gained access to your devices, which you use for internet browsing.
After that, I have started tracking your internet activities.

Here is the sequence of events:
Some time ago I have purchased access to email accounts from hackers (nowadays, it is quite simple to purchase such thing online).
Obviously, I have easily managed to log in to your email account (baheti.mm.tara2@blogger.com).

One week later, I have already installed Trojan virus to Operating Systems of all the devices that you use to access your email.
In fact, it was not really hard at all (since you were following the links from your inbox emails).
All ingenious is simple. =)

This software provides me with access to all the controllers of your devices (e.g., your microphone, video camera and keyboard).
I have downloaded all your information, data, photos, web browsing history to my servers.
I have access to all your messengers, social networks, emails, chat history and contacts list.
My virus continuously refreshes the signatures (it is driver-based), and hence remains invisible for antivirus software.

Likewise, I guess by now you understand why I have stayed undetected until this letter...

While gathering information about you, I have discovered that you are a big fan of adult websites.
You really love visiting porn websites and watching exciting videos, while enduring an enormous amount of pleasure.
Well, I have managed to record a number of your dirty scenes and montaged a few videos, which show the way you masturbate and reach orgasms.

If you have doubts, I can make a few clicks of my mouse and all your videos will be shared to your friends, colleagues and relatives.
I have also no issue at all to make them available for public access.
I guess, you really don't want that to happen, considering the specificity of the videos you like to watch, (you perfectly know what I mean) it will cause a true catastrophe for you.

Let's settle it this way:
You transfer $950 USD to me (in bitcoin equivalent according to the exchange rate at the moment of funds transfer), and once the transfer is received, I will delete all this dirty stuff right away.
After that we will forget about each other. I also promise to deactivate and delete all the harmful software from your devices. Trust me, I keep my word.

This is a fair deal and the price is quite low, considering that I have been checking out your profile and traffic for some time by now.
In case, if you don't know how to purchase and transfer the bitcoins - you can use any modern search engine.

Here is my bitcoin wallet: 16aqr3rXxCtxa8AK3ErftnBQLfzyyhjpXJ

You have less than 48 hours from the moment you opened this email (precisely 2 days).

Things you need to avoid from doing:
*Do not reply me (I have created this email inside your inbox and generated the return address).
*Do not try to contact police and other security services. In addition, forget about telling this to you friends. If I discover that (as you can see, it is really not so hard, considering that I control all your systems) - your video will be shared to public right away.
*Don't try to find me - it is absolutely pointless. All the cryptocurrency transactions are anonymous.
*Don't try to reinstall the OS on your devices or throw them away. It is pointless as well, since all the videos have already been saved at remote servers.

Things you don't need to worry about:
*That I won't be able to receive your funds transfer.
- Don't worry, I will see it right away, once you complete the transfer, since I continuously track all your activities (my trojan virus has got a remote-control feature, something like TeamViewer).
*That I will share your videos anyway after you complete the funds transfer.
- Trust me, I have no point to continue creating troubles in your life. If I really wanted that, I would do it long time ago!

Everything will be done in a fair manner!

One more thing... Don't get caught in similar kind of situations anymore in future!
My advice - keep changing all your passwords on a frequent basis

Sunday, February 7, 2021


---------- Forwarded message ---------
From: madan mohan Baheti <baheti.mm@gmail.com>
Date: Mon, 13 Jul 2020 at 7:35 PM
To: baheti.mm.t. <baheti.mm.tara1@blogger.com>, <baheti.mm.tara2@blogger.com>, <baheti.mm.tara4@blogger.com>, Ram Dhall <dhall.ram@gmail.com>, <kalampiyush@hotmail.com>, <kamal.hint@gmail.com>, navin singhi <navinsudha@gmail.com>, Rakesh Sinha <rakesh.sinha2407@gmail.com>, Ritu Baheti <ritubaheti@gmail.com>, Siddharth shanker jha <siddharthsjha@gmail.com>, Vanesa Míguez Agra <vmagra@gmail.com>, A.K. Khosla <ak19711@gmail.com>, Dr. Prakash Joshi <drjoship52@gmail.com>, Dwarka Baheti <dwarkabaheti1@gmail.com>, Jagdish Baheti <bahetijagdish1@gmail.com>, Sumit Bhartiya <skbH2000@gmail.com>, Vinita Lahoti <vinita.lahoti1@gmail.com>

अदिति और अविनाश के रोके पर

आज हृदय है प्रफुल्लित ,मन में है आनंद
अदिति और अविनाश का ,बंधता है संबंध
बंधता है संबंध  ख़ुशी  का  है  ये मौका
प्रथम चरण परिणय का,आज हो रहा रोका
कह घोटू कविराय प्रार्थना  यह इश्वर  से
सावन की रिमझिम सा प्यार हमेशा बरसे

आनंदित अरविन्द जी ,और आलोक मुस्काय
अति हुलसित है वंदना ,बहू अदिति सी पाय
बहू अदिति सी पाय ,बहुत ही खुश है श्वेता
पाकर के अविनाश ,प्रिय दामाद चहेता
कह घोटू कविराय ,बहुत खुश नाना नानी
टावर टू को छोड़ अदिति टावर वन आनी

नाजुक सी है आदिति ,कोमल सा अविनाश
इसीलिये है जुड़ गयी ,इनकी जोड़ी ख़ास
इनकी जोड़ी खास ,बना कर भेजी रब ने
जुग जुग  जियें  साथ ,दुआ ये दी है सबने
कह घोटू खुश रहें सदा ,दोनों जीवन भर
इन दोनों में बना रहे   अति  प्रेम परस्पर

मदन मोहन बाहेती  'घोटू '


---------- Forwarded message ---------
From: madan mohan Baheti <baheti.mm@gmail.com>
Date: Mon, 27 Jul 2020 at 7:09 AM
To: baheti.mm.t. <baheti.mm.tara1@blogger.com>, <baheti.mm.tara2@blogger.com>, <baheti.mm.tara4@blogger.com>, Ram Dhall <dhall.ram@gmail.com>, <kalampiyush@hotmail.com>, <kamal.hint@gmail.com>, navin singhi <navinsudha@gmail.com>, Rakesh Sinha <rakesh.sinha2407@gmail.com>, Ritu Baheti <ritubaheti@gmail.com>, Siddharth shanker jha <siddharthsjha@gmail.com>, Vanesa Míguez Agra <vmagra@gmail.com>, A.K. Khosla <ak19711@gmail.com>, Dr. Prakash Joshi <drjoship52@gmail.com>, Dwarka Baheti <dwarkabaheti1@gmail.com>, Jagdish Baheti <bahetijagdish1@gmail.com>, Sumit Bhartiya <skbH2000@gmail.com>, Vinita Lahoti <vinita.lahoti1@gmail.com>, <shweta_lp2005@yahoo.com>

अदिति अविनाश विवाह

है कोमल कमल सा अविनाश दूल्हा ,
दुल्हन अदिति है नाजुक सी प्यारी
बड़े भोले भाले है समधी हमारे ,
बड़ी प्यारी प्यारी है समधन हमारी
खुशकिस्मती से ही मिलती है ऐसी ,
मुबारक हो सबको ,नयी रिश्तेदारी
बन्ना और बनी की ,बनी दोस्ती ये
रहे बन हमेशा ,दुआ है हमारी

मदन मोहन बाहेती 'घोटू '

Tuesday, February 2, 2021

बचना ऐ हसीनो -इन बूढ़ों से

साठ के पार होते है ,मगर स्मार्ट होते है
पेंशन इनको मिलती है ,बड़े ही ठाठ होते है
तुम इनकी सादगी और मीठी बातों में न आना
 संभल के रहना ये बुड्ढे ,बड़े खुर्राट होते है

बड़ी मासूमियत से आपके ये दिल को हर लेंगे
अगर देखोगी मुस्काकर,मोहब्बत तुमसे कर लेंगे
पकड़ ऊँगली पहुंची तक ,पहुंचने में ये माहिर है ,
जरा सी घास डालोगी ,ये पूरा खेत चर  लेंगे

बड़ी मंहंगी पुरानी चीज है 'एंटीक 'कहलाती
पुराने चावलों से खुशबुएँ आती है मनभाती
भले ही कितना भी बूढा अगर हो जाए बंदर पर,
गुलाटी मारने की आदतें उसकी नहीं जाती

नज़र कमजोर ,आदत छूटती ना ताका झांकी की
न हिम्मत जाम पीने की ,मगर तलाश साकी की
राम का नाम लेने की ,उमर में रासलीला का ,
मज़ा मिल जाय कैसे भी ,है हसरत उम्र बाकी की

न फल है ना ही पत्ते है ,ये लगते पेड़ सूखे है
बहुत खेले खिलाये है ,मगर ये अब भी भूखे है
कभी भी भूल कर इनसे ,दया से प्यार मत करना
मिला जब भी इन्हे मौका ,कभी भी ये न चूके है

मदन मोहन बाहेती 'घोटू ' 
ऐसा क्यों ?

लड़की अगर हो सीधी ,तो गाय कहाती है ,
लड़का अगर हो सीधा ,तो गधा क्यों कहाता
पत्नी की बात माने ,तो इसमें हर्ज क्या है ,
गुलाम जोरू का पर क्यों पति कहा जाता
विज्ञापनों में देखा ,औरत के वास्ते तो ,
होते है क्रीम,लोशन और लिपस्टिक के सारे ,
मर्दों के लिए खुजली और दाद की दवा का
या बवासीर ,कब्जी का विज्ञापन क्यों आता


Sunday, January 31, 2021

कैसे जाता वक़्त गुजर है

मुझको खुद मालूम नहीं है ,कैसे जाता वक़्त गुजर है
सोना,जगना ,खाना,पीना ,क्या जीवन बस इतना भर है

कम्बल कभी रजाई चादर ,या फिर पंखा ,कूलर,ए सी
ठिठुरन ,सिहरन,तपन,बारिशें ,मौसम की गति बस है ऐसी
अलसाया तन ,मुरझाया मन ,बढ़ी उमर का हुआ असर है
मुझको खुद मालूम नहीं है ,कैसे जाता वक़्त गुजर है

सूरज उगता ,दिन भर तपता ,फिर ढल जाता अस्ताचल में
लेकिन वो बेबस होता जब ,बादल  ढक  लेते है पल में
कब ढक ले आ बादल कोई, पल पल लगता रहता डर है
मुझको खुद मालूम  नहीं है ,कैसे जाता वक़्त गुजर है

बीते दिन की यादों में मन, बस खोया ही रहता अक्सर
आते याद ख़यालों में वो,रख्खा जिनका ख्याल उमर भर  
नहीं मगर उनको अब रहता ,ख्याल हमारा ,रत्ती भर है
मुझको खुद मालूम नहीं है ,कैसे जाता वक़्त गुजर है

मदन मोहन बाहेती 'घोटू '

Friday, January 29, 2021

Negative SEO Services


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मन की कोई कामना पूरी होने पर ,
कुछ करने का संकल्प ,
होता है मनौती
पर गौर से देखा जाए  तो  ,
यह एक तरह की रिश्वत है होती
जो हम भगवान को देते है
और ये कहते है
कि प्रभु ,अगर आप
मेरा फलां फलां काम  दोगे साध
तो मैं आपको चढ़ाऊंगा इतना परशाद
या मैं आपको सोने या चांदी का छत्र चढ़ाऊंगा
आपके दर्शन के लिए ,परिवार संग आऊंगा
पर जब आप करते है कोई भी कामना
उसके पूरा होने की ,होती है ५०%सम्भावना
और इस तरह आधी मनोतियां पूर्ण हो जाती है
और उस देवता में ,आपकी श्रद्धा बढ़ जाती है
बचपन से ही हमारे संस्कार
ढल जाते है इस प्रकार
कि भगवान अगर परीक्षा में पास हो जाऊँगा
तो इतने रूपये का परशाद चढ़ाऊंगा
और पास होने पर आप प्रशाद चढ़ाएंगे
हालांकि आधी मिठाई खुद खाएंगे
ऐसे में माँ बाप भी मना नहीं करते
क्योंकि वो भी बचपन से ,
सत्यनारायण की कथा आये है सुनते  
और घबराते है कि मनौती पूरी नहीं करने पर
लीलावती कलावती का हश्र ,उन पर न जाए गुजर
हमारी ये ही अंध आस्था
खोल देती है रास्ता
कुछ ख़ास मंदिरों में भीड़ बढ़ाने का
मान्यता पूरी होने पर परशाद चढाने का
इस तरह फलां फलां मंदिर के चमत्कार
का करके प्रचार
हम भेड़धसान की तरह मंदिरो में भीड़ बढ़ा रहे है
परशाद चढ़ा रहे है
आप कितने भी बड़े बुद्धिजीवी हो या अज्ञानी
पर काम बन जाता है तो हो जाते दानी
क्योंकि अगर ५०%लोगों की ५०%मनोकामनाएं
अगर प्रोबेबिलिटी के सिंद्धांत से पूर्ण हो जाए
तो इसका श्रेय मिलता है उस भगवान को ,
और कहा जाता है मनौती का असर दिखा है
और अगर कामना पूरी नहीं होती ,
तो सोचते है भाग्य में नहीं  लिखा है
ये हमारी आस्था ही है ,जिस पर संसार टिका है

मदन मोहन बाहेती 'घोटू '

हर घड़ी  मैं घड़ी देखता ही रहा ,
तेरा दीदार हो ,आयी ना वो घड़ी
बेकरारी बढ़ी ,तू है प्यारी बड़ी ,
तेरी तस्वीर मैंने है दिल में मढ़ी
सपने बुनता रहा ,सर मैं धुनता रहा ,
थी निगाहें मेरी ,द्वार पर ही अड़ी
तू नहीं बेवफ़ा ,ना तू मुझसे खफ़ा ,
कौनसी बेबसी ,विपदा आ के पड़ी
मुश्किलें थी बड़ी ,सर उठाये खड़ी ,
कब कहाँ हो गयी है कोई गड़बड़ी
अश्क बहते रहे ,पीर सहते रहे ,
हर घडी लगता था ,सामने तू खड़ी

एक बेटी की फ़रियाद -माँ से

तेरी कोख में माँ ,पली और बढ़ी मैं
पकड़ तेरी ऊँगली,चली, हो खड़ी मैं
तेरे दिल का टुकड़ा हूँ ,मैं तेरी जायी
 नहीं होती बेटी ,कभी भी  परायी

तूने माँ मुझको ,पढ़ाया लिखाया  
सहीऔर गलत का है अंतर सिखाया  
नसीहत ने तेरी बनाया है  लायक
रही तू हमेशा ,मेरी मार्ग दर्शक
तूने संवारा है व्यक्तित्व मेरा    
तेरे ही कारण है अस्तित्व मेरा
तेरा रूप, तेरी छवि, प्यार हूँ मैं
जीवन सफ़र को अब तैयार हूँ मैं
मिले सुख हमेशा,यही करके आशा
मेरे लिए ,हमसफ़र है तलाशा
बड़े चाव से बाँध कर उससे बंधन
किया आज तूने ,विवाह का प्रयोजन
ख़ुशी से  करेगी ,तू मेरी बिदाई
नहीं होती बेटी ,कभी भी परायी

सभी रस्म मानूंगी ,जो है जरूरी
मगर दान कन्या की ,ना है मंजूरी
न सोना न चांदी ,इंसान मैं हूँ
नहीं चीज दी जाये ,जो दान में हूँ
मुझे दान दे तू ,नहीं मैं सहूंगी
तुम्हारी हूँ बेटी ,तुम्हारी रहूंगी
दे आशीष मुझको,सफल जिंदगी हो
किसी चीज की भी,कभी ना कमी हो
फलें और फूलें ,सदा खुश रहें हम
रहे मुस्कराते ,नहीं आये कोई ग़म
कटे जिंदगी का ,सफर ये सुहाना
मगर भूल कर भी ,मुझे ना भुलाना
रहे संग पति के ,हो माँ से जुदाई
नहीं होती बेटी ,कभी भी पराई

मदन मोहन बाहेती 'घोटू '
भूलने की बिमारी

बुढ़ापे में मुश्किल ये भारी हुई है
 मुझे भूलने की , बिमारी  हुई  है

रखूँ कुछ कहीं पर ,नहीं याद रहता
परेशां हो ढूँढूं ,किसी से न कहता
चश्मा कहीं पर भी रख भूल जाता
दवाई की गोली ,न टाइम से खाता
नहीं नाम लोगों के ,अब याद रहते
बिगड़े बहुत ही , है हालात रहते
बड़ी ही फ़जीयत  हमारी हुई है
मुझे भूलने की,  बिमारी हुई है  

नहीं याद रहती ,मुझे बात कल की
मगर याद ताज़ा ,कई बीते पल की
बचपन के दिन ,वो शरारत की बातें
जवानी के किस्से ,वो मस्ती की  रातें
वो भाई बहन संग ,लड़ना ,झगड़ना
वो माता की ममता ,पिताजी से डरना
वो जीवन्त ,सारी की सारी हुई है
मुझे भूलने की ,बिमारी  हुई   है  

अब जब सफ़र कट गया जिंदगी का  
संग याद आता है ,बिछड़े सभी का
हरेक दोस्त मुश्किल में जो काम आया  
 उन्हें  भूल कर भी ,भुला  मैं  न पाया  
नाम अब प्रभु का ,सुमरने  लगा हूँ
मोह माया से  अब  ,उबरने लगा  हूँ  
अंतिम सफर की ,तैयारी  हुई है
 मुझे भूलने की, बिमारी हुई है

मदन मोहन बाहेती 'घोटू '

Wednesday, January 20, 2021

पहले तो तुम ऐसी ना थी

अब तुमको क्या क्या बतलाऊँ ,अब तुम क्या हो ,पहले क्या थी
पहले तो तुम ऐसी ना थी

जब आयी थी दुल्हन बन कर ,तब तुम्हारा ,रूप ख़ास था
आँखों में लज्जा का पहरा ,अपनापन था और मिठास था
भोलीभाली सी सूरत से ,तुमने सबका मन लूटा था
तुमको पाकर ,मेरे मन में ,एक प्यार झरना फूटा था
आता याद ,मुझे वो कल जब ,तुम कल कल करती सरिता थी
पहले तो तुम ऐसी ना थी

तब तुम्हारे ,काले कुंतल , काँधे  पर झूमा करते थे
फूलों से कोमल गालों को ,भ्र्मरों  से चूमा करते थे
रक्तिम अधरों पर चुंबन था ,यौवन से थी ,तुम मदमाती
खिल जाते थे फूल हज़ारों ,जब तुम मस्ती में मुस्काती
यौवन से परिपूर्ण ,सुहानी ,सुंदरता की तुम प्रतिमा थी  
पहले तो तुम ऐसी ना थी

मेरे बिन बोले ही मेरे ,मन के भाव जान जाती थी
मेरे सारे प्रस्तावों  को ,नज़रें झुका ,मान जाती थी
ना तो करती ,कोई प्रश्न थी ,ना  गुंजाईश थी विवाद की
ना मन में मलाल रहता था ,अच्छी लगती ,सभी बात थी
निश्च्ल,चंचल,प्यारी प्यारी ,मुस्काती नन्ही गुड़िया थी
पहले तो तुम ऐसी ना थी

पहले कभी हुआ करती थी ,तुम सीधी सादी और भोली
अब सीधे मुंह बात न करती ,बहुत हो गयी हो बड़बोली
पहले प्यार लुटाती थी अब ,मुझे सताती ,बेदरदी  हो
पहले बासन्ती बहार थी ,अब तुम दिल्ली की सरदी हो
आपस में विचार मिलते थे ,मेरी हाँ तुम्हारी हाँ  थी
पहले तो तुम ऐसी ना थी

पहले पायल की रुनझुन थी ,अब तुम बादल की गर्जन हो
पहले नरम गर्म फुल्का थी ,हुई डबलरोटी अब तुम हो
अब ना तीर चलाते नयना ,अब न रहा वो रूप सलोना
हुई द्विगुणित काया अब तो ,फूला तन का कोना कोना
पहले तुम मेरी सुनती थी ,अब रहती हो मुझे सुनाती
पहले तो तुम ऐसी ना थी
पहले थी तुम कली महकती ,अब कुम्हलाया हुआ फूल हो
पहले कोमल ,कमल फूल सी ,अब चुभने वाला त्रिशूल हो
पहले शर्म हया की पुतली ,बहुत लजीली  और शरमीली
अब तेवर तीखे दिखलाती ,बहुत हो गयी हो रोबीली
 पहले सेवाभाव भरा था ,तुममे प्रेम भरी गरिमा थी
पहले तो तुम ऐसी ना थी

शांत और शीतल स्वभाव था ,सबके प्रति मन में दुलार था
एक पालतू गैया सी तुम ,देती थी बस दूध प्यार का
अब तो कितना ही पुचकारो ,बात बात पर बिगड़ झगड़ती
मन माफिक यदि कुछ न होता ,झट से सींग मारने लगती
कभी शरम से जो झुकती थी ,वो आँखें रहती ,दिखलाती
पहले तो तुम ऐसी ना थी

अब तो यही प्रार्थना प्रभु से ,कि तुम पहले सी हो जाओ
पहले सी ही प्रीत दिखाओ ,पहले जैसी ही मुस्काओ
बचे खुचे जीवन के कुछ दिन ,हम तुम ,ख़ुशी ख़ुशी मिल काटें
मेलजोल रख ,रहे प्यार से ,सबके संग में ,खुशियां बांटे
हो प्रयाग फिर से जब मिलती ,प्यार भरी गंगा यमुना थी
पहले तो तुम ऐसी ना थी

मदन मोहन बाहेती 'घोटू '
 देवता और आदमी  

नहीं एक उसमे ,हजारों कमी है
नहीं देवता  वो  ,तभी आदमी है

फंसा मोह माया में ,होकर के अँधा
कई गलतियों का ,जो होता पुलंदा
करम से कमीना ,विचारों से गंदा
सदा भूल जाता ,जो अपनी जमीं है
नहीं देवता वो ,तभी आदमी है

समझ जो न पाता ,औरों की पीड़ा
करने की सेवा ,उठाता न  बीड़ा
भोगों में डूबा हुआ है जो कीड़ा
लालच और लिप्सा में काया रमी है
नहीं देवता वो ,तभी आदमी है

बसेगा ह्रदय में जब सत्य उसमे
छलकेगा जब प्यारअपनत्व उसमे
आयेगा तब ही तो देवत्व उसमे
अहम् से रहे दूर ,ये लाजमी है
नहीं देवता वो ,तभी आदमी है

मदन मोहन बाहेती 'घोटू '
मैं तुमसे गुस्सा हूँ

हम है जनम जनम के साथी ,दिया बाती साथ हमारा
एक दूसरे के सुख दुःख में ,बन कर रहते ,सदा सहारा
पर तुम मन की बात छुपाते ,अपनी पीड़ा नहीं बताते
उसे बांटती ख़ुशी ख़ुशी मैं ,यदि कुछ अपनापन दिखलाते
एक जान जब कि हम तुम है ,मैं तुम्हारा ही हूँ हिस्सा
तुम अपना गम नहीं बांटते ,जाओ,मैं तुमसे हूँ गुस्सा  

तुम करते सागर का मंथन ,मेरु जैसी मथनी बन कर
मिलते रतन ,बाँट सब देते ,खुद विष पीते ,बन शिवशंकर
सुखी और खुशहाल रहे हम ,तुम दुःख सहते ,इसीलिये हो
हमें नहीं अपराध बोध हो ,कुछ ना कहते ,इसीलिये हो
खुद पर करते सभी कटौती ,रोज रोज का है ये किस्सा
तुम अपना गम नहीं बांटते , जाओ मैं हूँ तुम पर गुस्सा

तुम पैदल दफ्तर जाते हो ,ताकि कुछ पैसे बच जाये
फटे वस्त्र भी पहनो ताकि ,मेरी नव साड़ी आ जाए
तुमको शौक मिठाई का पर ,ना खाते कह,डाइबिटीज है
अपनी इच्छा दबा दबा कर ,ना खरीदते कोई चीज  है
तुमने ये किफायती फंदा ,खुद के ऊपर ही है कस्सा
तुम अपना गम नहीं बताते ,जाओ ,मैं तुम पर हूँ गुस्सा

मदन मोहन बाहेती 'घोटू ' 

दिनभर काम में रह कर व्यस्त
थका हुआ मैं ,थकी हुई तुम ,
दोनों पस्त
जब हम लेटते है बिस्तर पर
तेरी बांह मुझको लपेट लेती है
अपने  पास समेट  लेती है
मैं तेरे सीने पर
सर रख कर
सो जाता हूँ
बड़ा सुकून पाता हूँ
जब तुम मेरे सर को थपथपाती हो
बालों में उँगलियाँ डाल ,सहलाती हो
मेरे दिल की धड़कन
हर क्षण
सुनाई देती है मधुर संगीत बन
और तुम्हारी साँसों के स्वर
मेरी साँसों से टकरा कर
देते है इतना नशा भर
कि मैं सो जाता हूँ ,
तेरी उँगलियों में ,अपनी उँगलियाँ फंसा कर
रोज रोज चलता है यही क्रम
तुम और हम
प्यार का बंधन
यही है जीवन

मदन मोहन बाहेती 'घोटू ' 
बुढ्ढों  का दम

सभी सीनियर के लिये ,बड़े गर्व की बात
राष्ट्रपति 'वाइडन 'बने ,मिली 'ट्रम्प 'को मात
मिली 'ट्रम्प' को मात ,उमर जिसकी अठहत्तर
चार साल तक राज्य करेगा ,अमेरिका पर
कह घोटू कविराय , नहीं क्या  ऐसा  लगता
बूढा हो इंसान ,बहुत कुछ पर कर सकता

पत्नी ताने मारती ,थी हम पर हर बार
 कि हम अब बूढ़े हुये ,नाकामा ,लाचार
नाकामा ,लाचार ,बचा ना अब हममें दम
अमेरिका की राष्ट्रपति ,जब बने 'वाइडन '
 अठहत्तर का बूढा अब सब  पर है हावी
समझो मैडम , बुढ्ढों में दम रहता काफी


Saturday, January 16, 2021

Wednesday, January 13, 2021

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Friday, January 8, 2021

फुर्सत की ग़ज़ल

बैठे थे फुरसत में ,उनका दिल लगाने लग गये  
एक दिन जब हम उन्हें गाने सुनाने  लग गये
हमको ना सुर की पकड़ थी ,ना पकड़ थी ताल की ,
बेसुरे हम ,कान  उनके ,बस  पकाने लग गये
हमारे गाने की तानो  ने बिगाड़ा उनका मन ,
वो खफ़ा होकर हमें ,ताने सुनाने लग गये
बुढ़ापे में आशिक़ी का भूत कुछ ऐसा चढ़ा ,
मूड उनका सोने का था ,हम सताने लग गये
'घोटू 'कुछ ना काम है ना काज है ,हम क्या करें ,
वक़्त अपना इस तरह से ,हम बिताने लग गये